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बिना अनुमति वर्षों से चल रहा डिजिटल सिस्टम नगर पालिका बालोद पर गंभीर सवाल

अपर कलेक्टर को लिखित शिकायत, RTI में प्रशासनिक स्वीकृति का रिकॉर्ड नहीं मिलने का दावा

बालोद। जिले में सुशासन और पारदर्शिता के दावों के बीच नगर पालिका परिषद बालोद से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जनहित के मुद्दों को लेकर सक्रिय नागरिक उमेश कुमार सेन ने नगर पालिका में वर्षों से संचालित कम्प्यूटर एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए अपर कलेक्टर को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है।


शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर पालिका परिषद बालोद में लंबे समय से कम्प्यूटर आधारित कार्य एवं डिजिटल लेखा प्रणाली संचालित की जा रही है, लेकिन इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति, आदेश अथवा प्रस्ताव का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में विभाग द्वारा संबंधित प्रशासनिक स्वीकृति उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बिना वैधानिक अनुमति के किसी भी डिजिटल अथवा वित्तीय प्रणाली का संचालन शासन के नियमों के विपरीत माना जा सकता है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन एवं जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
नगर पालिका से राज्य स्तर तक पहुंचा मामला
मामले को लेकर उमेश कुमार सेन द्वारा पहले नगर पालिका परिषद बालोद में आवेदन प्रस्तुत कर संबंधित दस्तावेज एवं स्वीकृति की जानकारी मांगी गई। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय बालोद में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मामला दुर्ग संभाग कार्यालय तक पहुंचाया गया। साथ ही राज्य स्तर पर भी संबंधित विभागों एवं उच्च अधिकारियों को आवेदन भेजकर पूरे प्रकरण की जांच की मांग की गई।
इसके अतिरिक्त, RTI के माध्यम से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया गया, जिसमें कथित रूप से प्रशासनिक स्वीकृति का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई। शिकायतकर्ता ने इस मुद्दे को सुशासन त्यौहार के दौरान आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में भी उठाया।
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि नगर पालिका, जिला, संभाग एवं राज्य स्तर तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई या स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। इसी कारण पुनः अपर कलेक्टर के समक्ष विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की गई है।
उन्होंने आवेदन में मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सुशासन और पारदर्शिता पर उठे सवाल
सुशासन त्यौहार जैसे मंच पर इस विषय को उठाया जाना यह दर्शाता है कि आम नागरिक अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा रखते हैं। अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस गंभीर शिकायत की जांच कितनी तत्परता से की जाती है।

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