बालोद के गार्डनों में आखिर क्या हो रहा है? परिवारों ने बनानी शुरू की दूरी, खुलेआम अशोभनीय हरकतों पर फूटा लोगों का गुस्सा
पर्यावरण पार्क, बूढ़ातालाब समेत कई सार्वजनिक उद्यानों को लेकर उठे गंभीर सवाल; नागरिक बोले—"क्या अब बच्चों और परिवारों के साथ घूमना भी मुश्किल हो गया है?"

बालोद के गार्डनों में आखिर क्या हो रहा है? परिवारों ने बनानी शुरू की दूरी, खुलेआम अशोभनीय हरकतों पर फूटा लोगों का गुस्सा
पर्यावरण पार्क, बूढ़ातालाब समेत कई सार्वजनिक उद्यानों को लेकर उठे गंभीर सवाल; नागरिक बोले—”क्या अब बच्चों और परिवारों के साथ घूमना भी मुश्किल हो गया है?”
बालोद। शहर के पर्यावरण पार्क, बूढ़ातालाब के नए एवं पुराने गार्डन सहित कई सार्वजनिक उद्यान इन दिनों लोगों की नाराजगी का कारण बनते जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कुछ लोग खुलेआम सार्वजनिक मर्यादाओं की अनदेखी करते हुए अशोभनीय व्यवहार करते हैं, जिससे परिवारों, महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि जिन गार्डनों में कभी बच्चों की किलकारियां और परिवारों की रौनक दिखाई देती थी, वहां अब कई बार ऐसा माहौल बन जाता है कि परिवार बीच में ही लौटने को मजबूर हो जाते हैं। इससे सार्वजनिक स्थलों की गरिमा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि गार्डनों में नियमित पुलिस गश्त, प्रभावी सीसीटीवी निगरानी और महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर सभी को अपनी स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार सामाजिक मर्यादा और दूसरों की सुविधा का सम्मान करते हुए ही प्रयोग किया जाना चाहिए।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या बालोद के गार्डनों की गरिमा और पारिवारिक माहौल को बचाने के लिए प्रशासन जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा, या यह समस्या यूं ही बढ़ती रहेगी?



