जन मुक्ति मोर्चा की हुंकार से हिला दल्ली राजहरा, आखिर झुकना पड़ा BSP प्रबंधन को!
श्रमिकों के संघर्ष की गूंज पहुंची प्रशासन तक—त्रिपक्षीय बैठक में मांगें जायज मानी गईं, एक माह में लंबित मांग पूरी करने का निर्देश

जन मुक्ति मोर्चा की हुंकार से हिला दल्ली राजहरा, आखिर झुकना पड़ा BSP प्रबंधन को!
श्रमिकों के संघर्ष की गूंज पहुंची प्रशासन तक—त्रिपक्षीय बैठक में मांगें जायज मानी गईं, एक माह में लंबित मांग पूरी करने का निर्देश
दल्लीराजहरा। ठेका श्रमिकों की मांगों को लेकर जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ की बुलंद आवाज ने दल्ली राजहरा में हलचल पैदा कर दी। 1 सितंबर की सुबह 4 बजे से दल्ली माइंस के गेट नंबर-1 और 2 के सामने शुरू हुआ अनिश्चितकालीन आंदोलन आखिरकार बुधवार को निर्णायक मोड़ पर पहुंचा। प्रशासन की पहल पर हुई त्रिपक्षीय बैठक में श्रमिकों की मांगों को जायज माना गया और BSP प्रबंधन को लंबित मांग पर समय-सीमा के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
दो दिन चला आंदोलन, कई दौर की बैठक के बाद निकला रास्ता
आंदोलन के दौरान स्थानीय प्रशासन ने BSP प्रबंधन और जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। 1 सितंबर को थाना प्रभारी एवं तहसीलदार के नेतृत्व में माइंस कार्यालय में दो दौर की त्रिपक्षीय बैठक हुई, लेकिन BSP प्रबंधन के रुख के कारण तत्काल समाधान नहीं निकल सका।
इसके बाद 2 सितंबर को सुबह करीब 11:30 बजे दल्ली माइंस के कॉन्फ्रेंस हॉल में अनुविभागीय अधिकारी की अध्यक्षता में त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रशासनिक अधिकारी, BSP के आला अधिकारी और जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ।
बैठक में प्रशासन ने संगठन की श्रमिक हितों से जुड़ी मांगों को जायज बताते हुए BSP प्रबंधन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। खास तौर पर सेवानिवृत्त, मृत अथवा किसी अन्य कारण से काम से बाहर हुए श्रमिकों के स्थान पर नए श्रमिकों को काम पर रखने की मांग को एक माह के भीतर पूरा करने की समय-सीमा तय की गई।
21 जुलाई के ज्ञापन से शुरू हुआ संघर्ष
जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ ने 21 जुलाई 2026 को BSP के CGM को ज्ञापन सौंपकर ठेका श्रमिकों की समस्याओं को लेकर कई मांगें रखी थीं। इनमें ठेका श्रमिकों का सुरक्षा प्रशिक्षण, रिक्त हुए स्थानों पर नए श्रमिकों की नियुक्ति, जगन्नाथ स्टील प्लांट में समझौते के अनुसार मजदूरों को काम पर लेना, देव माइनिंग कंपनी में समान काम-समान वेतन तथा ग्रेवेटी ट्रेक्सिम प्राइवेट लिमिटेड (शारदा) में श्रमिकों को काम देने की मांग प्रमुख थी।
22 जुलाई को संगठन ने बरसते पानी के बीच आंदोलन किया था। उस दौरान प्रशासन की ओर से जांच एवं कार्रवाई का लिखित आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था। लेकिन जुलाई और अगस्त बीतने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर संगठन ने 1 सितंबर से फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया।
आश्वासन पर भरोसा, दोपहर 2 बजे आंदोलन समाप्त
त्रिपक्षीय बैठक में प्रशासन द्वारा एक माह की समय-सीमा तय किए जाने पर जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल ने सहमति जताई। इसके बाद बुधवार को दोपहर करीब 2 बजे आंदोलन वापस लेने की घोषणा की गई।
संगठन के सचिव बसंत कुमार रावटे ने माइक के माध्यम से आंदोलन समाप्त करने की घोषणा करते हुए अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, CSP राजहरा एवं थाना प्रभारी राजहरा के प्रति आभार जताया।
इस दौरान जीत गुहा नियोगी, बसंत रावटे, मूलचंद चंदेल, महेंद्र गंजिर, पवन विश्वकर्मा, सरकार दादा, संजय सिंह, तरुण उर्वशा, रूपा साहू, खिलावन कुंजाम, पुसउ, नरेश नायक, नवल चंद्राकर, ललित विश्वकर्मा, रोहित कोरेटी, जयसिंग दुग्गा, रघुवीर सहित सैकड़ों कार्यकर्ता एवं श्रमिक उपस्थित रहे।
“यह श्रमिक एकता और संघर्ष की जीत”
आंदोलन समाप्त होने के बाद जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ ने इसे श्रमिक एकता और लगातार संघर्ष की सफलता बताया। संगठन ने स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा निर्धारित एक माह की समय-सीमा में मांग पूरी होने की उम्मीद है। तय समय में कार्रवाई नहीं होने पर संगठन आगे की रणनीति पर निर्णय लेगा।




