तूएगोंदी मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज का बड़ा निर्णय
1 जून को बालोद में होगा विशाल विरोध प्रदर्शन, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट होगा समाज

बालोद। सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक कल शाम संपन्न हुई, जिसमें समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रमुख सियान एवं विभिन्न क्षेत्रों के सामाजिक प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक में तूएगोंदी मामले को लेकर जिला प्रशासन की चुप्पी और क्षेत्र में जारी अवैधानिक गतिविधियों पर गंभीर चर्चा की गई।
बैठक में पूर्व निर्धारित 28 मई 2026 के बालोद कलेक्टर घेराव कार्यक्रम पर विचार किया गया। प्रशासनिक अवकाश के चलते समाज ने लोकतांत्रिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया कि छुट्टी के दिन संयुक्त जिला कार्यालय का घेराव करना उचित नहीं होगा, क्योंकि उस दिन प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित नहीं रहेंगे और समाज की आवाज़ का जवाब देने कोई सामने नहीं आएगा।
सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि अब 1 जून 2026 को सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ द्वारा बालोद में विशाल विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। समाज ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन आदिवासी समाज के हक, अधिकार, जल-जंगल-जमीन, सभ्यता, संस्कृति और न्याय की रक्षा के लिए है।
बैठक में समाज के वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज सदैव संविधान और अपनी परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखता आया है, लेकिन यदि समाज के अधिकारों और अस्तित्व पर लगातार चोट की जाएगी तो समाज अब चुप नहीं बैठेगा।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि तूएगोंदी मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब प्रशासन और जिम्मेदार लोगों को देना होगा। समाज ने संकेत दिया कि उचित समय आने पर ये सवाल पूरे प्रदेश के सामने रखे जाएंगे। फिलहाल समाज ने सभी सगा बंधुओं से गहराई से चिंतन करने और सच्चाई को समझने की अपील की है।
“आखिर तूएगोंदी में चल क्या रहा है?”
“क्यों आदिवासी समाज अपने हक और इंसाफ की आवाज बुलंद कर रहा है?”
“जल-जंगल-जमीन और संस्कृति बचाने की लड़ाई आखिर किसलिए लड़ी जा रही है?”
इन सवालों को लेकर अब पूरे क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।
सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ ने प्रदेशभर के सामाजिक बंधुओं, युवाओं, माताओं-बहनों एवं जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे 1 जून 2026 को अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर समाज की एकता, शक्ति और अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाएं।
“एकता ही हमारी ताकत है — जल, जंगल, जमीन और संस्कृति की रक्षा के लिए अब हर आदिवासी को आगे आना होगा।”
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