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बालोद में अनोखी पहल: “108 बार जय श्री राम लिखो, मुफ्त में बाल कटवाओ”

Rudra Unisex Salon की प्रेरणादायक मुहिम — बच्चों को संस्कार, एकाग्रता और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

बालोद में अनोखी पहल: “108 बार जय श्री राम लिखो, मुफ्त में बाल कटवाओ” — बच्चों को संस्कारों से जोड़ने का अभिनव प्रयास
बालोद जिले में एक छोटी-सी पहल अब एक बड़ी प्रेरणा बनती जा रही है। Rudra Unisex Salon के संचालक द्वारा शुरू की गई इस अनोखी परंपरा ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है। यहां 5 से 15 वर्ष तक के बच्चों से बाल कटवाने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता — बस एक शर्त है कि बच्चे 108 बार “जय श्री राम” लिखकर लाएं।
स्थान: Rudra Unisex Salon, मधु चौक, बालोद
अब तक 200 से अधिक बच्चे इस पहल का हिस्सा बन चुके हैं। छोटे-छोटे हाथों से लिखे गए “जय श्री राम” के शब्द न सिर्फ कागज पर उतरते हैं, बल्कि उनके मन और संस्कारों में भी गहराई से बसते जा रहे हैं।
✍️ क्यों 108 बार “जय श्री राम” लिखना?
सनातन परंपरा में 108 संख्या का विशेष महत्व है। यह संख्या आध्यात्मिकता, ध्यान और एकाग्रता का प्रतीक मानी जाती है। जब बच्चे 108 बार “जय श्री राम” लिखते हैं, तो—
उनके भीतर धैर्य और एकाग्रता विकसित होती है
मन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार होता है
वे धीरे-धीरे धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ते हैं
लिखने की प्रक्रिया से हाथ और मस्तिष्क का संतुलन बेहतर होता है
📵 मोबाइल और टीवी से दूर, संस्कारों की ओर
आज के दौर में बच्चे मोबाइल और टीवी की दुनिया में ज्यादा उलझते जा रहे हैं। ऐसे में यह पहल उन्हें एक अलग दिशा देती है। जब बच्चा “जय श्री राम” लिखने बैठता है, तो वह कुछ समय के लिए स्क्रीन से दूर होकर एक सकारात्मक कार्य में लग जाता है।
यह केवल एक ऑफर नहीं, बल्कि एक संस्कार निर्माण अभियान बन चुका है — जहां बाल कटवाना सिर्फ सेवा नहीं, बल्कि सीखने और जुड़ने का माध्यम बन गया है।
👤 जनसेवा से जुड़ी प्रेरणादायक पहचान
इस पहल के पीछे जुड़े व्यक्तित्व उमेश कुमार सेन केवल एक व्यवसाय* संचालक ही नहीं, बल्कि समाजसेवा में सक्रिय एक समर्पित नाम भी हैं। वे पूर्व में बजरंग दल के जिला संयोजक रह चुके हैं और वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद के जिला सह मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
समाज और संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इस पहल में स्पष्ट रूप से झलकती है। वे लगातार जनहित के कार्यों में सक्रिय रहकर एक समर्पित जनसेवक के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
❤️ समाज में मिल रही सराहना
इस अनोखी सोच की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। अभिभावक भी इस पहल से खुश हैं क्योंकि उनके बच्चे न केवल एक अच्छी आदत सीख रहे हैं, बल्कि अपनी जड़ों से भी जुड़ रहे हैं।
🌼 एक छोटी पहल, बड़ा संदेश
आज जब समाज में संस्कारों की कमी की बात होती है, तब Rudra Unisex Salon की यह पहल यह साबित करती है कि बदलाव के लिए बड़े मंच की नहीं, बल्कि सच्ची सोच और छोटे कदम की जरूरत होती है।
यह सिर्फ बाल काटने की दुकान नहीं, बल्कि एक ऐसा स्थान बन गया है जहां
संस्कार, श्रद्धा और सकारात्मक सोच की नई कहानी लिखी जा रही है।

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