सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण पर हुआ मंथन
बालोद में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में 23 समाजों के प्रतिनिधियों ने लिया भाग, एकता और सहयोग का दिया संदेश

बालोद, 07 जून। सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बालोद में सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन संपन्न हुआ। बैठक में नगर एवं क्षेत्र के 23 विभिन्न समाजों के प्रमुख प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं प्रबुद्धजनों ने सहभागिता कर सामाजिक एकता और समन्वय को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं ओम् के प्रतीक चिह्न के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता राजेश ताम्रकार ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित एकता है। विभिन्न समाजों के बीच संवाद, सहयोग और समन्वय ही सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाता है तथा राष्ट्र को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाता है।
बैठक में तंबोली, साहू, यादव, निषाद, सेन, विश्वकर्मा, कश्यप, पटेल, ब्राह्मण, कुम्हार, सोनकर, निर्मलकर सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने समाजों के बीच परस्पर सहयोग, सामाजिक दायित्वों के निर्वहन, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं युवा पीढ़ी को संस्कारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
वक्ताओं ने कहा कि समाजों की सामूहिक शक्ति से ही सामाजिक चुनौतियों का समाधान संभव है। सभी समाज प्रमुखों ने आपसी भाईचारे, सौहार्द एवं समरसता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। बैठक में सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में संयुक्त सहभागिता बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित समाज प्रमुखों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए सामाजिक एकता और राष्ट्रहित के कार्यों को आगे भी निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया। बैठक ने बालोद में सामाजिक समन्वय और सद्भाव की दिशा में एक सकारात्मक संदेश देने का कार्य किया।
इस अवसर पर नगर एवं क्षेत्र के 23 समाजों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिससे कार्यक्रम सामाजिक एकता और सहयोग का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।




