गौरैय्या धम्मभूमि में पहली बार राज्य स्तरीय बौद्ध धम्म महोत्सव का आयोजन, हजारों उपासक-उपासिकाएं हुए शामिल
शरद पूर्णिमा पर पूज्य भंते डॉ. शील रत्न बोधि जी ने दी धम्मदेशना, विधायक कुंवर सिंह निषाद सहित अतिथियों का हुआ सम्मान

गौरैय्या धम्मभूमि में पहली बार राज्य स्तरीय बौद्ध धम्म महोत्सव का आयोजन, हजारों उपासक-उपासिकाएं हुए शामिल
शरद पूर्णिमा पर पूज्य भंते डॉ. शील रत्न बोधि जी ने दी धम्मदेशना, विधायक कुंवर सिंह निषाद सहित अतिथियों का हुआ सम्मान
बालोद। बौद्ध विरासत संरक्षण संघ, जिला बालोद के तत्वावधान में 25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर धम्मभूमि गौरैय्या (चौरेल), जिला बालोद में पहली बार राज्य स्तरीय बौद्ध धम्म महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में धम्मोपदेश देने के लिए धम्मालैंड, द रॉयल मोनास्टिक स्कूल, बिरबिरा (सिरपुर), जिला महासमुंद के फाउंडर प्रेसिडेंट पूज्य भंते डॉ. शील रत्न बोधि जी अपने भिक्खु संघ के साथ उपस्थित हुए। इस अवसर पर बालोद सहित कांकेर, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, धमतरी, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव तथा अन्य क्षेत्रों से हजारों बौद्ध उपासक-उपासिकाओं ने भाग लिया।
ग्राम चौरेल पुरातात्विक धरोहर के रूप में जिले और आसपास के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है। तांदुला नदी के संगम स्थल पर स्थित गौरैय्या का ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व है। बताया गया कि पूर्व में यहां बौद्ध विरासत फलती-फूलती रही। क्षेत्र में स्थित बावली की सफाई के दौरान अनेक स्तंभों और खंडित मूर्तियों के अवशेष मिले हैं। यहां खुदाई में प्राप्त बुद्ध प्रतिमाओं को पूर्वजों द्वारा निर्मित बुद्ध विहार में स्थापित किया गया है। ग्रामवासियों ने धम्मचक्र अंकित प्राचीन स्तंभ को चौक में स्थापित कर बुद्धदेव चौक की स्थापना भी की है।
रैली निकालकर की गई वंदना, भंते जी ने दिया धम्मोपदेश
कार्यक्रम के प्रथम चरण में पूज्य भंते डॉ. शील रत्न बोधि जी एवं भिक्खु संघ की अगुवाई में रैली निकाली गई। नगर भ्रमण करते हुए रैली बुद्धदेव चौक पहुंची, जहां वंदना की गई। इसके बाद आयोजन स्थल पर भिक्खु संघ को मंचस्थ किया गया और पूज्य भंते जी से धम्मदेशना देने की प्रार्थना की गई।
पूज्य भंते जी ने सर्वप्रथम उपस्थित जनों को त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण कराया। इसके बाद धम्मदेशना में दुखों से मुक्ति के मार्ग, चार आर्य सत्य और आर्य अष्टांगिक मार्ग का विस्तार से वर्णन करते हुए उनके महत्व को समझाया। उन्होंने दान पारमिता के अंतर्गत चिवरदान का महत्व भी बताया। अंत में सभी प्राणियों के सुख एवं कल्याण के लिए मंगल मैत्री कराई गई। धम्मदेशना के पश्चात चिवरदान किया गया।
विधायक कुंवर सिंह निषाद रहे मुख्य अतिथि
कार्यक्रम के दूसरे चरण में गुंडरदेही विधानसभा क्षेत्र के विधायक कुंवर सिंह निषाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विशिष्ट अतिथियों में भारतीय बौद्ध महासभा के राष्ट्रीय ट्रस्टी एस.आर. कांडे, उपाध्यक्ष पालनहार मेश्राम एवं प्रज्ञा कांडे, कानूनी सलाहकार संजय बेंद्रे, जिला अध्यक्ष दिलीप मेश्राम, वर्षा बागड़े एवं दीपक वैदे, पूर्व जिला अध्यक्ष तुलसीराम खोबरागड़े एवं वामन वानखेड़े, ग्राम चौरेल की सरपंच पूजा यादव, अपर कलेक्टर सुरेंद्र प्रसाद वैद्य, नगर पंचायत चौकी के पूर्व उपाध्यक्ष रितेश मेश्राम तथा बालोद के शिशु रोग विशेषज्ञ ए.व्ही. महेश्वर सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे। मंचस्थ अतिथियों का फूलमालाओं एवं गुलदस्ते भेंट कर स्वागत किया गया।
राष्ट्रीय ट्रस्टी एस.आर. कांडे ने पूर्व तहसील समिति बालोद के छगनलाल महेश्वर, रामेश्वर दहीवेले, नत्थूराम महेश्वरी, झाड़ू राम सुखदेव, देवलाल बोरकर सहित अन्य कर्मठ पदाधिकारियों के योगदान को याद करते हुए उनके कार्यों की सराहना की। सभी अतिथियों ने अपने उद्बोधन में आयोजन की प्रशंसा करते हुए समिति को धन्यवाद दिया।
बाबासाहेब के विचारों पर चलने का लिया संकल्प
मुख्य अतिथि विधायक कुंवर सिंह निषाद ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने समता, स्वतंत्रता, बंधुता और न्याय से परिपूर्ण संविधान दिया, जिसकी बदौलत वे विधायक बन सके। उन्होंने कहा कि वे हमेशा बाबासाहेब के ऋणी रहेंगे और उनके बताए मार्ग पर चलते रहेंगे।
विधायक ने अपने विद्यार्थी जीवन की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्षों पहले अर्जुंदा में भीम ज्योति आई थी, जिसकी अगुवाई उन्होंने की थी। उस दौरान उन्होंने बौद्ध समुदाय के साथ पूरे अर्जुंदा नगर का भ्रमण किया था। उन्होंने कहा कि वे भी बाबासाहेब के एक सिपाही हैं और बौद्ध समुदाय जब भी उन्हें सेवा के लिए याद करेगा, वे उपस्थित रहेंगे।
कर्मठ कार्यकर्ताओं एवं दिवंगत पदाधिकारियों को किया सम्मानित
उद्बोधन के पश्चात अतिथियों को मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। पूर्व तहसील समिति के उन कर्मठ कार्यकर्ताओं को भी विनम्र श्रद्धांजलि दी गई, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके परिजनों को मोमेंटो, पुष्पहार एवं गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया गया। बालोद जिले के विभिन्न परिक्षेत्रों के पदाधिकारियों और आयोजन को सफल बनाने में निस्वार्थ भाव से योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अंबेडकरवादी पुनेश्वर देवांगन एवं घनश्याम रात्रे को तथागत बुद्ध के उपदेशों पर आधारित पुस्तक भेंट कर स्वागत किया गया।
आयोजन की सफलता में अनेक लोगों का रहा सहयोग
कार्यक्रम का सफल संचालन आयुष्मान नागेंद्र कमड़े ने किया। स्वागत भाषण संघ के अध्यक्ष प्रवीण लोंहारे ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन हरमीत लेनपांडे ने किया। कार्यक्रम के समापन की घोषणा संघ के सचिव गुंजन रामटेक ने की।
आयोजन में डी.पी. लोंहारे, अनिल खोबरागड़े, जय नंदा, चंद्र कुमार बारसागढ़े, प्यारे बोरकर, सुनील रंगारे, देवेंद्र मेश्राम, सतीश वैदे, संगीता बोरकर, रत्ना मेश्राम, नीता कमल, ज्योत्सना मेश्राम, चंद्रशीला बाम्बेश्वर सहित अन्य लोगों का विशेष सहयोग रहा।
बौद्ध विरासत संरक्षण संघ की ओर से कार्यक्रम में शामिल सभी उपासक-उपासिकाओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया। संघ ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी इसी तरह सहयोग और सहभागिता मिलती रहेगी।
जानकारी: संजय सावलकर, मीडिया प्रभारी, बौद्ध विरासत संरक्षण संघ, गौरैय्या-चौरेल।




