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संसार की सबसे बड़ी दौलत विवेक है, समत्व भाव से जीवन की चुनौतियों का करें सामना : शासन दीपक अक्षय मुनि जी मसा

समता भवन की धर्मसभा में जीवन, विवेक, ईमानदारी और आत्मचेतना पर दिया प्रेरक संदेश, कई श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया उपवास तपस्या का संकल

संसार की सबसे बड़ी दौलत विवेक है, समत्व भाव से जीवन की चुनौतियों का करें सामना : शासन दीपक अक्षय मुनि जी मसा

समता भवन की धर्मसभा में जीवन, विवेक, ईमानदारी और आत्मचेतना पर दिया प्रेरक संदेश, कई श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया उपवास तपस्या का संकल्प

समता भवन। समता भवन प्रवचन श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में शासन दीपक श्री अक्षय मुनि जी मसा ने जीवन की चुनौतियों, विवेक, समत्व भाव और आत्मचेतना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हर इंसान के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कोई भी व्यक्ति इससे अछूता नहीं है। ऐसे समय में व्यक्ति को समत्व भाव बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यही भाव संसार के बंधनों को कम करने में सहायक होता है। व्यक्ति अपने विवेक से संसार के बंधनों को बढ़ा भी सकता है और घटा भी सकता है।

श्री अक्षय मुनि जी मसा ने कहा कि अच्छा स्वास्थ्य और अच्छा विवेक जीवन के महत्वपूर्ण वरदान हैं। यदि व्यक्ति में विवेक है, तो वह बड़ी से बड़ी मुसीबत का सामना कर सकता है। जीवन एक संगीत के समान है और चुनौतियां व्यक्ति की क्षमताओं को निखारने का अवसर देती हैं। मुसीबत के समय विवेक खो देना व्यक्ति को गलत दिशा में ले जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि इससे अनेक नई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसलिए कठिन परिस्थितियों में धैर्य, समझदारी और सकारात्मक सोच बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि संसार की सबसे बड़ी दौलत विवेक है। व्यक्ति को अहंकार से दूर रहना चाहिए और समाज में फूट डालने की नीति नहीं अपनानी चाहिए। सज्जन और महापुरुष सम्मान की चाह नहीं रखते, बल्कि अपने कर्मों और गुणों से पहचान बनाते हैं। मां के स्नेह और ममता में जो सुकून और खुशबू है, वह दुनिया के किसी बाजार के परफ्यूम में नहीं मिल सकती। व्यक्ति को दिखावे के बजाय अपनी काबिलियत विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

गुरु की कृपा से मिलता है विश्वास: प्रवचन में उन्होंने गुरु की महिमा बताते हुए कहा कि गुरु की कृपा से शिष्य विश्वासपात्र बनते हैं। भगवान महावीर के यश और कीर्ति को आज भी लोग नमन करते हैं। सुबह उठकर अपने इष्ट प्रभु का स्मरण करना जीवन में सकारात्मकता और श्रद्धा का भाव जगाता है।

श्री अक्षय मुनि जी मसा ने अनुभव के महत्व पर कहा कि झूठे दोस्त और खाली जेब व्यक्ति को जीवन की कई सच्चाइयां सिखा देते हैं। अनुभव से मिलने वाली शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है। व्यक्ति को ईमानदारी के साथ आत्मचेतना के लिए चिंतन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के दिखावे में पड़ने के बजाय वास्तविकता को समझना जरूरी है। जीवन में गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना ही समझदारी है।

उन्होंने कहा कि जीवन में सुख-दुख आते रहते हैं। कठिनाइयां व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं और जीवन के अनुभव उसे नई सीख देते हैं। यदि व्यक्ति अपने भीतर से अहंकार और वहम को निकाल दे, तो उसका जीवन बेहतर बन सकता है। उन्होंने यह भी समझाया कि कानों से सुनी और आंखों से देखी गई बात भी कभी-कभी गलत हो सकती है। इसलिए किसी भी बात पर निष्कर्ष निकालने से पहले विवेक और समझदारी से विचार करना चाहिए।

तपस्या के मार्ग पर श्रद्धालुओं का संकल्प: धर्मसभा में श्री अक्षय मुनि जी मसा की तपस्या का भी उल्लेख किया गया। वे पिछले सात वर्षों से लगातार चातुर्मास के दौरान आठ उपवास की तपस्या कर रहे हैं। वर्तमान में उनके सात उपवास की तपस्या चल रही है। इसी क्रम में संकेत ललवानी ने 10 उपवास, अजय बाफना ने 7 उपवास, सरला चोपड़ा और डिंपी चोपड़ा ने 5-5 उपवास तथा मोक्ष चोपड़ा ने 4 उपवास की तपस्या का प्रत्याख्यान कर संकल्प ग्रहण किया। धर्मसभा में तप, संयम, विवेक और आत्मकल्याण के संदेश को प्रमुखता से रखा गया।

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