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बालोद के 8 शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर पर गौरव

IISER पुणे में पीएमश्री की चार दिवसीय प्रतिष्ठित कार्यशाला में लिया प्रशिक्षण

बालोद के 8 शिक्षकों का राष्ट्रीय स्तर पर गौरव!
IISER पुणे में पीएमश्री की चार दिवसीय प्रतिष्ठित कार्यशाला में लिया प्रशिक्षण

वैज्ञानिक सोच, नवाचार और आधुनिक शिक्षा की तकनीकों से हुए रूबरू—अब विद्यालयों में विद्यार्थियों तक पहुंचेगा प्रशिक्षण का लाभ
बालोद। जिले के शिक्षा जगत के लिए गौरव की बात है कि बालोद के 8 शिक्षकों ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), पुणे जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थान में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की चार दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता की। केंद्र शासन की महत्वाकांक्षी पीएमश्री योजना के अंतर्गत आयोजित इस प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ के चयनित 100 शिक्षकों ने हिस्सा लिया।
⭐ बालोद के ये 8 शिक्षक बने राष्ट्रीय प्रशिक्षण का हिस्सा
कार्यशाला में बालोद जिले से पुनेश्वर साहू, शकील हुसैन, निर्मला मिंज, सुलेखा सुरेश, राकेश टंडन, नरोत्तम जागते, राजीव लाल नागवंशी एवं विद्यासागर टंडन ने सहभागिता की।
राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलने से जिले के इन शिक्षकों के अनुभव और प्रशिक्षण का लाभ अब उनके विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है।
🔬 शिक्षा में रटने के बजाय प्रयोग और गतिविधियों पर जोर
प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को केवल पारंपरिक शिक्षण पद्धति तक सीमित न रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता, नवाचार और आधुनिक शिक्षण तकनीकों से दक्ष बनाना रहा।
कार्यशाला में शिक्षकों ने सीखा कि कठिन विषयों को भी प्रयोग, गतिविधि, खिलौनों, कहानियों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए सरल, रोचक और जिज्ञासावर्धक कैसे बनाया जा सकता है।
🧠 कंप्यूटेशनल थिंकिंग से लेकर गतिविधि आधारित मूल्यांकन तक प्रशिक्षण
चार दिवसीय कार्यशाला में शिक्षकों को कंप्यूटेशनल थिंकिंग, कहानी आधारित शिक्षण, गतिविधियों के माध्यम से गणित की समझ, खिलौनों के माध्यम से विज्ञान, तर्क एवं प्रयोग, गतिविधि आधारित शिक्षण-पद्धति और आधुनिक मूल्यांकन तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कक्षा को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को देखकर, समझकर, प्रयोग करके और सवाल पूछकर सीखने का अवसर देना रहा।
🎯 “यहां से मिली ऊर्जा विद्यालयों में विज्ञान की चेतना विकसित करेगी”
कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर IISER पुणे के डीन अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं जनसंपर्क प्रोफेसर अर्णब मुखर्जी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को उनके प्रारंभिक शिक्षक लंबे समय तक याद रहते हैं। शिक्षक ही बच्चों के चरित्र निर्माण के साथ-साथ उनके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानने और उसे निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वहीं राज्य समन्वयक पीएमश्री समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ आशीष गौतम ने कहा कि सभी शिक्षक एक बड़े उद्देश्य के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यहां से प्राप्त ऊर्जा एवं अनुभव को विद्यालयों तक पहुंचाकर विज्ञान और गणित की चेतना विकसित करने के साथ शिक्षा में नए दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जाएगा।
🔭 विज्ञान केंद्र से तारांगण तक—सीखा बहुत कुछ
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विज्ञान केंद्र पिंपरी-चिंचवड़ और IISER पुणे द्वारा स्थापित ‘कल्पगृह’ का शैक्षणिक भ्रमण किया।
यहां उन्होंने हैंड्स-ऑन गतिविधियों के जरिए विज्ञान एवं गणित की अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के गुर सीखे। शिक्षकों ने ऑटोमोबाइल उद्योग की बारीकियां, 3-डी मूवी के माध्यम से पर्यावरण पर मानव गतिविधियों के प्रभाव तथा तारांगण में ग्रह-नक्षत्र और सौरमंडल से जुड़ी जानकारी भी प्राप्त की।
📚 प्रशिक्षण का उद्देश्य—विद्यालयों में बदलेगा सीखने का तरीका
इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि शिक्षकों को ऐसी तकनीकों से परिचित कराया गया, जिन्हें वे वापस अपने विद्यालयों में लागू कर सकते हैं। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा, तार्किक क्षमता, रचनात्मकता और प्रयोग आधारित सीखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल हो सकती है।
👏 IISER एवं समग्र शिक्षा टीम का महत्वपूर्ण योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में अशोक रूपनर, सीनियर टेक्निकल ऑफिसर, अंकिश त्रिपुड़े एवं टीम तथा श्रीमती इंद्राणी बालन, साइंस एक्टिविटी सेंटर IISER पुणे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ की ओर से ट्रेनिंग कोऑर्डिनेटर अनुराग जॉन एवं भागवत साहू भी उपस्थित रहे।
बालोद के आठ शिक्षकों की इस राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला में सहभागिता को जिले की शिक्षा व्यवस्था में आधुनिकता, प्रयोगधर्मिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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