तीन आदिवासी श्रमिकों की मौत पर गरजा राजहरा, भाजपा–बीएमएस ने खोला मोर्चा
बीएसपी अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप, थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन; 10 दिन में गिरफ्तारी नहीं तो होगा विभागों का घेराव

तीन आदिवासी श्रमिकों की मौत पर गरजा राजहरा, भाजपा–बीएमएस ने खोला मोर्चा
बीएसपी अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप, थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन; 10 दिन में गिरफ्तारी नहीं तो होगा विभागों का घेराव
दल्ली राजहरा। राजहरा टाउनशिप में सीवरेज लाइन बिछाने के दौरान तीन आदिवासी ठेका श्रमिकों की दर्दनाक मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। घटना में कथित लापरवाही को लेकर भारतीय जनता पार्टी राजहरा मंडल और खदान मजदूर संघ भिलाई संबद्ध भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने मोर्चा खोलते हुए दल्ली राजहरा थाना प्रभारी को संयुक्त ज्ञापन सौंपा। संगठन ने मामले में जिम्मेदार बीएसपी अधिकारियों एवं अन्य दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की है।
भाजपा राजहरा मंडल अध्यक्ष रामेश्वर साहू एवं खदान मजदूर संघ भिलाई संबद्ध बीएमएस अध्यक्ष मुश्ताक अहमद ने संयुक्त बयान में आरोप लगाया कि सीवरेज लाइन बिछाने के कार्य में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी की गई। नेताओं के मुताबिक, टेंडर में निर्धारित व्यवस्था के विपरीत मशीनरी का उपयोग किया गया और निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी कार्य कराया जाता रहा।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कार्य के दौरान मिट्टी धंसने और चेन टूटने के बाद पाइप के नीचे दबने से तीन श्रमिकों की मौत हुई। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कार्य में इस्तेमाल की जा रही मशीन का बीमा तक नहीं था, इसके बावजूद उससे कार्य कराया गया।
भाजपा और बीएमएस नेताओं ने कहा कि यदि कार्यस्थल पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता और जिम्मेदार अधिकारी सतर्कता बरतते, तो संभवतः यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।
“निलंबन के बाद बहाली से उठे सवाल”
नेताओं ने आरोप लगाया कि घटना के बाद बीएसपी प्रबंधन ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के नाम पर उन्हें केवल सात दिनों के लिए निलंबित किया और बाद में पुनः उसी पद पर बहाल कर दिया गया। संगठन ने इसे मृत श्रमिकों के परिवारों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार पदों से हटाया जाना चाहिए।
एफआईआर और गिरफ्तारी की प्रमुख मांग
संयुक्त ज्ञापन में संगठन ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं तथा एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने, आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
नेताओं ने कहा कि यह केवल एक सामान्य दुर्घटना का विषय नहीं है, बल्कि कार्यस्थल पर सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए दोष तय होने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
तीन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों में—
◆ स्वर्गीय बिसाखीन बाई — गोंड
◆ स्वर्गीय किसुन सोरी — गोंड
◆ स्वर्गीय रमेश कुमार मानिकपुरी — पनिका
शामिल हैं। संगठन ने कहा कि मृतकों के परिवारों को न्याय दिलाना और घटना के लिए जिम्मेदारी तय करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
10 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी
भाजपा और बीएमएस नेताओं ने प्रशासन को 10 दिन का समय देते हुए कहा कि यदि इस अवधि में जिम्मेदार अधिकारियों की गिरफ्तारी एवं ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो संबंधित विभागों का घेराव कर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन की प्रतिलिपि सांसद भोजराज नाग को भी सौंपे जाने की जानकारी दी गई है, ताकि क्षेत्र के आदिवासी श्रमिक परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक पहल हो सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान नगरपालिका अध्यक्ष तोरणलाल साहू, लखनलाल चौधरी, युवा मोर्चा अध्यक्ष सागर गनीर, एल्डरमैन ललित जैन, पार्षद भूपेंद्र श्रीवास, समर्थ लखानी, एल्डरमैन राकेश देवांगन, मुकेश खस, जीवन साहू, बंटी चोपड़े, राहुल साहू, रोहित साहू, विमल यादव, सोहन जायसवाल, टकेश्वर, समेन्दर निर्मलकर, अनूप साहू, अजहर खान, मोहर्रम हुसैन, सोनू ठगेल, देवा साहू, डामेन्दर साहू, परसराम साहू, धीराजी साहू, विजय साहू, ललित जायसवाल, अमित कुमार, देवेंद्र कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
भाजपा–बीएमएस का स्पष्ट संदेश: “तीन श्रमिकों की मौत का जवाबदेही तय हो, जांच निष्पक्ष हो और दोषियों पर कानून के तहत कठोर कार्रवाई हो—अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा।”




