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सड़क तो बन गई, लेकिन हर बारिश में मौत से मुकाबला! टेकापार-नेवारीकला में पुल नहीं, तो हर सफर खतरे से खाली नहीं

प्रशासन ने सड़क निर्माण शुरू किया, लेकिन तांदुला नदी पर पुल के अभाव में स्कूली बच्चे, किसान और मजदूर रोज़ जान जोखिम में डालने को मजबूर; ग्रामीण बोले—"अब आश्वासन नहीं, पुल चाहिए"

सड़क तो बन गई, लेकिन हर बारिश में मौत से मुकाबला! टेकापार-नेवारीकला में पुल नहीं, तो हर सफर खतरे से खाली नहीं

प्रशासन ने सड़क निर्माण शुरू किया, लेकिन तांदुला नदी पर पुल के अभाव में स्कूली बच्चे, किसान और मजदूर रोज़ जान जोखिम में डालने को मजबूर; ग्रामीण बोले—”अब आश्वासन नहीं, पुल चाहिए”

बालोद। ग्राम टेकापार से नेवारीकला जाने वाले मार्ग का पुनर्निर्माण कार्य आखिरकार शुरू हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से उठ रही मांग और लगातार किए गए प्रयासों के बाद प्रशासन हरकत में आया और सड़क निर्माण शुरू हुआ। इससे ग्रामीणों को राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार तांदुला डेम का जलस्तर बढ़ते ही नदी उफान पर आ जाती है, जिससे टेकापार और नेवारीकला के बीच आवागमन बेहद खतरनाक हो जाता है। बरसात के मौसम में स्कूली बच्चों, किसानों, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। लोगों का कहना है कि हर बारिश उनके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होती और हमेशा किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बनती है, फिर भी स्थायी समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास नजर नहीं आते।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ तांदुला नदी पर शीघ्र मजबूत पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि हजारों लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल निर्माण नहीं कराया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि सड़क के साथ पुल निर्माण भी तत्काल शुरू किया जाए, क्योंकि यही इस क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी और सुरक्षित समाधान है।

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