मासूमों की सेहत से खिलवाड़: आंगनबाड़ी के सामने चिकन वेस्ट का अंबार, बदबू और गंदगी से बढ़ा संक्रमण का खतरा
बारिश में सड़ते मुर्गी अवशेषों से क्षेत्र बना बीमारी का केंद्र, नागरिकों में आक्रोश; प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

मासूमों की सेहत से खिलवाड़: आंगनबाड़ी के सामने चिकन वेस्ट का अंबार, बदबू और गंदगी से बढ़ा संक्रमण का खतरा
बारिश में सड़ते मुर्गी अवशेषों से क्षेत्र बना बीमारी का केंद्र, नागरिकों में आक्रोश; प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
बालोद। बच्चों के पोषण और सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी निभाने वाला आंगनबाड़ी केंद्र आज खुद गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझता नजर आ रहा है। शहर के वार्ड क्रमांक 7, पाण्डेपारा काशीबन तालाबपार स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के समीप खुले में फेंके जा रहे मुर्गियों के अवशेष (चिकन वेस्ट) और आसपास फैली गंदगी ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण सड़ते अवशेषों से उठ रही असहनीय दुर्गंध, मच्छरों और मक्खियों का बढ़ता प्रकोप तथा जहरीले जीवों की मौजूदगी से मासूम बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडराने लगा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पोल्ट्री फार्मों की बीमार मुर्गियां तथा चिकन दुकानों से निकलने वाले अवशेष खुले स्थानों पर फेंके जा रहे हैं। इससे पूरा क्षेत्र मानो कचरा डंपिंग स्थल में तब्दील हो गया है। लोगों ने प्रशासन से सभी पोल्ट्री फार्मों और चिकन दुकानों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बारिश ने बढ़ाई परेशानी, संक्रमण का खतरा गहराया
मानसून की बारिश के बीच खुले में पड़े मुर्गी अवशेष तेजी से सड़ रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में तीव्र दुर्गंध फैल रही है। गंदगी के कारण मच्छर और मक्खियां बड़ी संख्या में पनप रहे हैं, वहीं आसपास सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव भी दिखाई देने लगे हैं। ऐसे माहौल में आंगनबाड़ी आने वाले छोटे बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वच्छता के दावों पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि एक ओर सरकार स्वच्छता और कुपोषण मुक्त समाज का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर मासूम बच्चे गंदगी और बदबू के बीच शिक्षा और पोषण प्राप्त करने को मजबूर हैं। अभिभावकों को आशंका है कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो बच्चे संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
पहले भी उठ चुका है मामला, फिर भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गंभीर समस्या की जानकारी पहले भी संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक मुर्गी अवशेषों के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निस्तारण के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बनाई गई है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण आम नागरिकों और मासूम बच्चों को अस्वच्छ वातावरण में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
नागरिकों की प्रमुख मांगें
आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास फैले चिकन वेस्ट को तत्काल हटाकर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए।
पूरे क्षेत्र में कीटनाशकों का छिड़काव कर संक्रमण फैलने की आशंका को रोका जाए।
खुले में चिकन वेस्ट फेंकने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाए।
शहर से दूर मुर्गी अवशेषों के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए स्थायी डंपिंग स्थल बनाया जाए।
बारिश के मौसम में नियमित सफाई, निगरानी और जलभराव रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो यह समस्या बड़े स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है। अब देखना यह होगा कि नगर पालिका प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या पर कब संज्ञान लेकर मासूम बच्चों और स्थानीय नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाता है।




