आस्था के मंदिर के सामने ‘नशे का अड्डा’! श्रद्धालुओं का गुस्सा सातवें आसमान पर, प्रशासन को दो टूक—अब कार्रवाई नहीं हुई तो अनशन में बैठेंगे श्रद्धालु
शेष माता मंदिर परिसर में कथित नशाखोरी, असामाजिक तत्वों के जमावड़े और निर्माण को लेकर भक्तों ने खोला मोर्चा; एसडीएम से लेकर थाना प्रभारी तक पहुंचा शिकायत का मामला

आस्था के मंदिर के सामने ‘नशे का अड्डा’! श्रद्धालुओं का गुस्सा सातवें आसमान पर, प्रशासन को दो टूक—अब कार्रवाई नहीं हुई तो अनशन में बैठेंगे श्रद्धालु
शेष माता मंदिर परिसर में कथित नशाखोरी, असामाजिक तत्वों के जमावड़े और निर्माण को लेकर भक्तों ने खोला मोर्चा; एसडीएम से लेकर थाना प्रभारी तक पहुंचा शिकायत का मामला
गुंडरदेही (बालोद)। जिस पवित्र धाम में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर माथा टेकते हैं, उसी शेष माता मंदिर के सामने यदि नशाखोरी और असामाजिक गतिविधियों के आरोप लगें, तो यह सिर्फ एक मंदिर का मामला नहीं, बल्कि आस्था, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था—तीनों पर बड़ा सवाल है। गुंडरदेही में शेष माता मंदिर परिसर को लेकर अब श्रद्धालुओं का सब्र जवाब दे चुका है। बड़ी संख्या में भक्तों ने एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ज्ञापन सौंपा है।
श्रद्धालुओं ने एसडीएम, तहसीलदार, नगर पंचायत सीएमओ और थाना प्रभारी गुंडरदेही को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि मंदिर के सामने स्थित शासकीय खाली जमीन और परिसर के आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है। श्रद्धालुओं का दावा है कि वहां नशाखोरी, गाली-गलौज और हुड़दंग जैसी गतिविधियों के कारण मंदिर आने वाले भक्तों को असहजता और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
‘मंदिर के सामने आखिर किसका राज?’
ज्ञापन में श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि पूर्व में परिसर में उपलब्ध कराए गए एक भवन का कथित रूप से दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ बाहरी लोगों की गतिविधियों के कारण मंदिर का माहौल प्रभावित हो रहा है। श्रद्धालुओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि आखिर शासकीय जमीन और मंदिर परिसर के आसपास ऐसी गतिविधियों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
श्रद्धालुओं ने राजनीतिक संरक्षण के भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भक्तों का कहना है कि प्रशासन को बिना किसी दबाव के मामले की जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।
विधायक निधि से जुड़े निर्माण पर भी सवाल
श्रद्धालुओं ने मांग की है कि मंदिर के सामने स्थित भवन को हटाने की कार्रवाई की जाए। साथ ही वहां प्रस्तावित या स्वीकृत किसी भी नए निर्माण तथा विधायक निधि से संबंधित आवंटन की भी समीक्षा की जाए। श्रद्धालुओं ने मांग रखी कि यदि निर्माण से मंदिर की पवित्रता, सुरक्षा या श्रद्धालुओं की सुविधा प्रभावित होती है तो उसे निरस्त अथवा अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
बाहरी लोगों और मत्स्य सोसायटी की गतिविधियों की जांच की मांग
ज्ञापन में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर के आसपास आने वाले संदिग्ध बाहरी लोगों तथा मत्स्य सोसायटी से जुड़े लोगों की गतिविधियों की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। भक्तों का कहना है कि प्रशासन जांच कर यह स्पष्ट करे कि शासकीय भूमि और मंदिर के आसपास आखिर किस उद्देश्य से गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
‘आज नहीं जागे तो कल देर हो जाएगी!’
श्रद्धालुओं ने प्रशासन को साफ शब्दों में चेताया है कि मंदिर जैसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े स्थल पर किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई और भविष्य में कोई अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या प्रशासन श्रद्धालुओं की इस आवाज को सुनेगा? क्या मंदिर परिसर को असामाजिक गतिविधियों से मुक्त कराया जाएगा? या फिर कार्रवाई के लिए किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जाएगा?
ज्ञापन सौंपने के दौरान बी.पी. डिल्लावार, नंदलाल, केशवराम, रुद्र कुमार, जिज्ञासा सहित बड़ी संख्या में मंदिर से जुड़े श्रद्धालु मौजूद रहे।




