बालोद के नाड़ी वैद्य की देशभर में धूम! वीरेंद्र देशमुख को मिला राष्ट्रीय सम्मान, अब संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी
जड़ी-बूटी और नाड़ी परीक्षण की प्राचीन विद्या को राष्ट्रीय मंच पर मिली नई पहचान; राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनकर लौटे गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख, बालोद में बधाइयों का लगा तांता बालोद।

बालोद के नाड़ी वैद्य की देशभर में धूम! वीरेंद्र देशमुख को मिला राष्ट्रीय सम्मान, अब संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी
जड़ी-बूटी और नाड़ी परीक्षण की प्राचीन विद्या को राष्ट्रीय मंच पर मिली नई पहचान; राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनकर लौटे गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख, बालोद में बधाइयों का लगा तांता
बालोद।
जिस बालोद की धरती पर परंपरागत चिकित्सा और जड़ी-बूटियों का ज्ञान पीढ़ियों से जीवित है, अब उसी बालोद की आवाज देश के बड़े मंच तक पहुंच गई है। जिले के प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य और समाजसेवी गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख को अखिल भारतीय परंपरागत वन औषधि प्रशिक्षित वैद्य महासंघ का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। उनकी इस उपलब्धि से बालोद जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।
🔥 राष्ट्रीय मंच पर बालोद का डंका!
नगर पंचायत उतई में आयोजित महासंघ के दो दिवसीय राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय प्रशिक्षण और शपथ ग्रहण समारोह में देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे वैद्यों, आयुर्वेद विशेषज्ञों और महासंघ के पदाधिकारियों की मौजूदगी में गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में शपथ ली।
उनके मनोनयन की खबर सामने आते ही बालोद सहित पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। धार्मिक, सामाजिक और संत समाज से जुड़े लोगों ने इसे बालोद के लिए गौरव का क्षण बताया।
🌱 जहां नाड़ी से बीमारी की पहचान और जड़ी-बूटी से उपचार पर हुआ मंथन
राष्ट्रीय शिविर में परंपरागत चिकित्सा पद्धति के विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा हुई। नाड़ी परीक्षण, दुर्लभ वन औषधियों की पहचान और प्राकृतिक उपचार पद्धति जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। वहीं जरूरतमंदों के लिए निःशुल्क नेत्र जांच शिविर भी आयोजित किया गया।
वन औषधियों और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों की प्रदर्शनी ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
💬 वीरेंद्र देशमुख बोले—”यह पद नहीं, परंपरा को बचाने की जिम्मेदारी है”
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की नई जिम्मेदारी मिलने पर गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख ने कहा कि परंपरागत चिकित्सा पद्धति केवल उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा है। इसे संरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि महासंघ के माध्यम से देशभर के पारंपरिक वैद्यों को एक मजबूत मंच देने, विलुप्त होती औषधीय वनस्पतियों के ज्ञान को संरक्षित करने और परंपरागत चिकित्सा को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
🛕 बालोद लौटे तो फूल-मालाओं से हुआ स्वागत, मिठाई खिलाकर दी बधाई
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने के बाद बालोद लौटे गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख का धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने आत्मीय स्वागत किया। उनके समर्थकों, संत समाज और प्रबुद्ध नागरिकों ने पुष्पमालाएं पहनाकर सम्मान किया और मुंह मीठा कराकर शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर डॉ. बिरेन्द्र देशमुख, संस्थापक—कामधेनु सिद्ध काली मंदिर भेड़ी एवं चौंसठ योगिनी मंदिर, ज्योतिष महाराज विनोद गिरी गोस्वामी, अध्यक्ष—अखिल भारतीय संत समिति जिला बालोद एवं बंजारी धाम जुगेरा, तथा उमेश कुमार सेन, पूर्व बजरंग दल जिला संयोजक, वर्तमान विश्व हिंदू परिषद जिला महामंत्री, सेन समाज जिला मीडिया प्रभारी एवं अध्यक्ष—प्रेस रिपोर्टर क्लब ब्लॉक बालोद सहित अनेक लोगों ने बधाई दी।
⭐ “गुरुदेव का सम्मान नहीं, बालोद की परंपरा का सम्मान है”
क्षेत्रवासियों और सामाजिक-धार्मिक संगठनों ने कहा कि गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख को मिली यह जिम्मेदारी सिर्फ उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि बालोद की धरती पर जीवित परंपरागत चिकित्सा ज्ञान और वन औषधि की विरासत का राष्ट्रीय सम्मान है।
लोगों ने उम्मीद जताई कि गुरुदेव वीरेंद्र देशमुख के नेतृत्व में देश की प्राचीन नाड़ी चिकित्सा और वन औषधि परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह ज्ञान आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सकेगा।




