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जामा मस्जिद दल्ली राजहरा में शान से लहराया तिरंगा, गूंजा राष्ट्रप्रेम का संदेश

शहीदों के बलिदान को किया नमन, सदर शेख नैय्यूम ने कहा—“देश सबसे पहले, हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत”

जामा मस्जिद दल्ली राजहरा में शान से लहराया तिरंगा, गूंजा राष्ट्रप्रेम का संदेश

शहीदों के बलिदान को किया नमन, सदर शेख नैय्यूम ने कहा—“देश सबसे पहले, हमारी एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत”

दल्ली राजहरा। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर जामा मस्जिद दल्ली राजहरा के प्रांगण में शनिवार सुबह 9 बजे राष्ट्रीय पर्व को पूरे सम्मान, गरिमा और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। जामा मस्जिद के सदर शेख नैय्यूम ने राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया। तिरंगे के शान से लहराते ही पूरा परिसर राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर हो उठा।
इस अवसर पर सदर शेख नैय्यूम ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि भारत की आजादी हमें विरासत में नहीं मिली, बल्कि इसके लिए असंख्य वीरों ने अपना जीवन न्योछावर किया है। अनेक देशभक्तों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगाया, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। आज स्वतंत्रता दिवस उन महान वीरों के त्याग, तपस्या और बलिदान को याद करने का दिन है।
उन्होंने कहा कि हमारी पहचान सबसे पहले भारतीय होने की है। धर्म, जाति और भाषा से ऊपर उठकर देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना हम सभी का कर्तव्य है। जिस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए हमारे वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उसकी गरिमा बनाए रखना हर भारतीय की जिम्मेदारी है।
जामा मस्जिद के पूर्व सदर मुश्ताक अहमद अंसारी ने कहा कि आजादी के आंदोलन में देश के हर वर्ग और समुदाय के लोगों ने अपना योगदान दिया। लाखों लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्भीक होकर संघर्ष किया और अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि आजादी का असली सम्मान तभी होगा, जब हम देश की एकता, शांति और भाईचारे को मजबूत करेंगे।
उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा, मेहनत, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना ही शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जामा मस्जिद दल्ली राजहरा के सचिव जुबैर अहमद ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संकल्प लेने का भी अवसर है। हमें आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर एक-दूसरे का सम्मान करते हुए “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को मजबूत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की तरक्की किसी एक व्यक्ति या समाज की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब देश का हर नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करेगा, तभी भारत और अधिक मजबूत, समृद्ध एवं विकसित राष्ट्र बनेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों ने देश की एकता, अखंडता, शांति और भाईचारे को मजबूत करने तथा राष्ट्रहित में सदैव अपना योगदान देने का संकल्प लिया।
शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही—देश को मजबूत बनाएं
जामा मस्जिद परिसर से इस स्वतंत्रता दिवस पर यह संदेश भी दिया गया कि शहीदों का बलिदान केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित न रहे, बल्कि उनके सपनों का भारत बनाने के लिए हर नागरिक अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभाए।
तिरंगा हमारी शान है, भारत हमारी पहचान है और देश की एकता हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
ध्वजारोहण कार्यक्रम में हाफिज अब्दुल बशीर, हाफिज गुलाम सिमनानी, हाफिज हकीक, सदर मस्जिद कमेटी शेख नैय्यूम, पूर्व सदर मुश्ताक अहमद अंसारी, सदर मदरसा कमेटी सऊद आलम, सचिव जुबैर अहमद, मोहम्मद फिरोज, फरीद मोहम्मद, कलीम बड़गुजर, रफीक भाई, निजाम भाई, मोहम्मद फारूख, इसराइल भाई, इलियास कुरैशी, इमरान (इम्मू) भाई, सोहेल भाई, मुख्तार मुक्कु भाई, नवाब बड़गुजर, आरिफ भाई, शहादत भाई, आतिफ, हसीब, इमरान भाई, मोहम्मद अता, मोहम्मद फरहद, आदिल अहमद सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं नागरिक उपस्थित रहे।

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