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मजदूर अधिकारों की आवाज बनी बालोद की धरती, बारिश में भी गूंजा बीएमएस का हुंकार
देशव्यापी आंदोलन के तहत बालोद में एकदिवसीय धरना प्रदर्शन — मजदूरों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और ₹30 हजार न्यूनतम वेतन समेत विभिन्न मांगों को लेकर बुलंद हुई आवाज
बालोद, 17 अगस्त 2026। मजदूरों के अधिकार, सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने सोमवार को देशव्यापी आंदोलन के तहत बालोद में जोरदार एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया। बस स्टैंड स्थित धरना स्थल पर सुबह से हो रही बारिश भी मजदूरों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं के हौसले को नहीं डिगा सकी। बारिश के बीच बड़ी संख्या में श्रमिकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार से मजदूरों की लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई। बीएमएस के पदाधिकारियों ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और उत्पादन व्यवस्था की मजबूत नींव रखने वाला श्रमिक वर्ग आज महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत, अस्थिर रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी देश के समग्र विकास के लिए उचित नहीं है।
बारिश बनी परीक्षा, लेकिन नहीं टूटा मजदूरों का हौसला
देशव्यापी आंदोलन के तहत आयोजित इस प्रदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ, खदान मजदूर संघ भिलाई, बिजली संघ, भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर संघ, राज्य कर्मचारी संघ सहित बीएमएस से जुड़े विभिन्न अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।
लगातार बारिश के बावजूद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिकाओं और श्रमिकों ने धरना स्थल पर मौजूद रहकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान मजदूर एकता और अधिकारों को लेकर जोरदार नारेबाजी भी हुई।
मुश्ताक अहमद अंसारी ने उठाई श्रमिकों की बुलंद आवाज
धरना प्रदर्शन के मुख्य वक्ता एवं भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री मुश्ताक अहमद अंसारी ने कहा कि मजदूर देश की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके श्रम से उद्योग, निर्माण, खनन, ऊर्जा और विभिन्न सेवाएं संचालित होती हैं, लेकिन मेहनत के अनुरूप मजदूरों को सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पाना चिंता का विषय है।
उन्होंने विशेष रूप से स्कीम वर्कर्स के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि आंगनबाड़ी, आशा, मध्यान्ह भोजन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े कर्मचारी वर्षों से महत्वपूर्ण सेवाएं दे रहे हैं। शासन इनसे नियमित रूप से सेवाएं लेता है, इसलिए इनके अधिकारों, मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की सुरक्षा पर गंभीरता से निर्णय लिया जाना चाहिए।
बीएमएस के मांग पत्र में प्रमुख मुद्दे
धरना प्रदर्शन के माध्यम से बीएमएस ने मजदूर हितों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सरकार के समक्ष रखे।
🔹 न्यूनतम वेतन ₹30,000: बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए फॉर्मूला आधारित न्यूनतम वेतन ₹30 हजार प्रतिमाह निर्धारित करने की मांग।
🔹 EPS-95 पेंशन में बढ़ोतरी: न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 प्रतिमाह करने तथा इसे VDA एवं आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ने की मांग।
🔹 ESI और EPF सीमा में वृद्धि: ESI की पात्रता सीमा ₹21 हजार से बढ़ाकर ₹42 हजार तथा EPF सीमा ₹15 हजार से बढ़ाकर ₹30 हजार करने की मांग।
🔹 समान काम, समान वेतन: सभी संविदा कर्मचारियों के लिए ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ लागू करने की मांग।
🔹 बोनस एवं ग्रेच्युटी में सुधार: श्रमिकों को उनके वास्तविक वेतन के आधार पर बोनस और बेहतर ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग।
🔹 बैंकिंग में 5-दिवसीय कार्यप्रणाली: बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग।
🔹 रिक्त पदों पर भर्ती: सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग।
🔹 ठेका श्रमिकों का शोषण रोकने की मांग: मजदूरों का वेतन रोकने या भुगतान में धोखाधड़ी करने वाले ठेकेदारों एवं मैनपावर एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की मांग।
श्रमिक हितों के विपरीत प्रावधानों का बीएमएस ने किया विरोध
धरना प्रदर्शन के दौरान बीएमएस ने इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (IR Code) और OSH&WC Code के श्रमिक हितों से जुड़े प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई। संगठन ने कहा कि श्रमिकों से संबंधित नीतियां बनाने से पहले केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ व्यापक चर्चा और संवाद आवश्यक है।
बीएमएस ने केंद्र सरकार से भारतीय श्रम सम्मेलन (ILC) जल्द बुलाकर ट्रेड यूनियनों के साथ खुली चर्चा शुरू करने की मांग भी रखी।
कई प्रमुख पदाधिकारियों ने किया संबोधित
धरना प्रदर्शन को मुख्य वक्ता मुश्ताक अहमद अंसारी के साथ प्रदेश पर्यावरण संयोजक लखनलाल चौधरी, प्रदेश महामंत्री आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ माधुरी रथ, प्रदेश उपाध्यक्ष कुलेश्वरी साहू एवं राष्ट्रीय मंत्री आयशा खान ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्ष श्रीमती कमला चन्द्राकार, सेक्टर प्रभारी श्रीमती संजय कुमारी, श्रीमती सुनीता साहू, श्रीमती पूर्णिमा बैस, श्रीमती शांति साहू, श्रीमती चित्राणी निषाद, श्रीमती लक्ष्मी पटेल, श्रीमती कुमुदिनी देशमुख, मीडिया प्रभारी जैबा अख्तर, संजु रामटेके, त्रिलोका लेडिया, संगीता आरदा, पिलेश्वरी सहित बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका संघ के सदस्य उपस्थित रहे। खदान मजदूर संघ भिलाई सहित अन्य श्रमिक संगठनों के श्रमिकों ने भी आंदोलन में सहभागिता की।
सरकार को स्पष्ट संदेश—मजदूरों के अधिकारों से समझौता नहीं
धरना प्रदर्शन के समापन अवसर पर बीएमएस ने कहा कि भारत जैसे विशाल श्रमबल वाले देश में श्रमिकों के लिए ऐसी राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है, जो बदलती कार्य परिस्थितियों के अनुरूप उनके अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे।
बीएमएस का कहना है कि मजदूरों को उचित वेतन, सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षित कार्य वातावरण दिए बिना देश का वास्तविक और समावेशी आर्थिक विकास संभव नहीं है। बारिश के बीच बालोद में जुटे श्रमिकों की एकजुटता ने यही संदेश दिया कि—‘श्रमिक मजबूत होगा, तभी देश मजबूत होगा।’
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