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हर बच्चे का भविष्य संवारना हमारी जिम्मेदारी” — शिक्षा व्यवस्था को लेकर कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा का सख्त और संवेदनशील रुख

गुण्डरदेही के स्कूलों की कलेक्टर ने की गहन समीक्षा, बेहतर परिणाम के लिए बनाई जवाबदेही की रणनीति | 85% उपस्थिति, मासिक टेस्ट और शिक्षक व्यवस्था पर विशेष जोर

“हर बच्चे का भविष्य संवारना हमारी जिम्मेदारी” — शिक्षा व्यवस्था को लेकर कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा का सख्त और संवेदनशील रुख

गुण्डरदेही के स्कूलों की कलेक्टर ने की गहन समीक्षा, बेहतर परिणाम के लिए बनाई जवाबदेही की रणनीति | 85% उपस्थिति, मासिक टेस्ट और शिक्षक व्यवस्था पर विशेष जोर

बालोद, 19 अगस्त 2026।
बालोद जिले की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा लगातार सक्रिय हैं। जिले के पांचों विकासखण्डों में शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा के क्रम में उन्होंने बुधवार को गुण्डरदेही विकासखण्ड के हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों की बैठक लेकर स्कूलवार स्थिति की बारीकी से समीक्षा की।
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने बैठक में स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य केवल परीक्षा परिणाम का आंकड़ा नहीं, बल्कि जिले की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता का प्रतिबिंब है। उन्होंने प्राचार्यों एवं शिक्षकों से पूरी लगन, ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रत्येक विद्यार्थी का अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
स्कूलवार परिणामों की पड़ताल, कमजोर प्रदर्शन पर जवाबदेही तय
कलेक्टर ने कक्षा 10वीं एवं 12वीं के पिछले दो वर्षों के परीक्षा परिणामों की स्कूलवार तुलना कर शिक्षा सत्र 2025-26 के परिणामों की समीक्षा की। उन्होंने कमजोर परिणाम वाले विषयों की स्थिति पर संबंधित शिक्षकों से सीधे जानकारी ली और परिणाम सुधारने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि कमजोर विद्यार्थियों को बेहतर स्तर तक पहुंचाने के साथ मेधावी विद्यार्थियों को प्रावीण्य सूची में स्थान दिलाने के लिए विशेष रणनीति बनाई जाए। खराब या असंतोषजनक परीक्षा परिणाम पाए जाने पर संबंधित प्राचार्य एवं शिक्षकों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए। जिला शिक्षा अधिकारी को आवश्यकतानुसार कारण बताओ नोटिस जारी करने को भी कहा गया।
85 प्रतिशत उपस्थिति का लक्ष्य, बच्चों की नियमितता पर कलेक्टर की पैनी नजर
विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति की जून एवं जुलाई माह की स्थिति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिया कि विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के पालकों से नियमित संपर्क, बैठक एवं संवाद करने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों की स्कूल में नियमितता सुनिश्चित हो सके। साथ ही 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल नहीं करने के संबंध में भी निर्देश दिए।
मासिक टेस्ट से होगी सीखने के स्तर की पहचान
कलेक्टर ने प्रत्येक विद्यालय में हर माह अनिवार्य रूप से मासिक टेस्ट लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टेस्ट के परिणाम का विश्लेषण कर कमजोर बच्चों के लिए अतिरिक्त शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने प्राचार्यों को निर्देशित किया कि हर बच्चे की शैक्षणिक प्रगति पर नजर रखी जाए और किसी भी विद्यार्थी को पढ़ाई में पीछे न छूटने दिया जाए।
शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में मानसेवी शिक्षकों की व्यवस्था
विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी लेते हुए कलेक्टर ने कहा कि विषय शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने ऐसे विद्यालयों में मानसेवी शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को क्लस्टरवार स्कूलों का निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था एवं परीक्षा परिणामों की नियमित समीक्षा करने को कहा।
बरबसपुर स्कूल के प्रयासों को बनाया मॉडल
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरबसपुर के शिक्षा सत्र 2025-26 के परीक्षा परिणामों में हुए उल्लेखनीय सुधार की विशेष सराहना की। उन्होंने प्राचार्य एवं शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि उनके प्रयास अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणादायी हैं।
उन्होंने गुण्डरदेही विकासखण्ड के अन्य स्कूलों को भी बरबसपुर मॉडल को अपनाकर अपने परीक्षा परिणामों में सुधार लाने की सलाह दी।
शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और नशामुक्ति भी प्राथमिकता
कलेक्टर ने गंभीर बीमारियों से पीड़ित विद्यार्थियों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से उत्कृष्ट संस्थानों में निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की जानकारी दी। उन्होंने ऐसे बच्चों को चिन्हित कर समय पर सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे से दूर रखना केवल विद्यालय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कलेक्टर ने शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को 30 जुलाई को आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता के लिए धन्यवाद भी दिया।
कलेक्टर का संदेश साफ—शिक्षा में गुणवत्ता भी होगी, जवाबदेही भी
गुण्डरदेही की समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा की कार्यशैली का एक स्पष्ट पक्ष सामने आया—बच्चों के भविष्य को लेकर संवेदनशीलता और शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता को लेकर सख्ती। उन्होंने जहां बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों और विद्यालयों की सराहना की, वहीं कमजोर परिणाम और लापरवाही के मामलों में जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर की इस पहल से जिले में शिक्षा व्यवस्था को परिणामोन्मुख बनाने, विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति बढ़ाने और कमजोर बच्चों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में ठोस प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी श्री दीपक दुबे, डीएमसी श्री अवन कुमार जांगड़े, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी तथा गुण्डरदेही विकासखण्ड के हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों के प्राचार्य एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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