शहीद कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी जी के शहादत को सलाम: इतिहास के पन्नों से लेकर हम सबके दिलों तक आज भी जिंदा हैं शहीद कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी
35वें शहादत दिवस पर दल्ली राजहरा में उमड़ा जनसैलाब; लाल-हरे झंडों, फ्लैग मार्च, जनगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नारों के बीच याद किए गए नियोगी—आयोजकों के अनुसार 7 से 8 हजार लोग हुए शामिल

शहीद कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी जी के शहादत को सलाम: इतिहास के पन्नों से लेकर हम सबके दिलों तक आज भी जिंदा हैं शहीद कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी
35वें शहादत दिवस पर दल्ली राजहरा में उमड़ा जनसैलाब; लाल-हरे झंडों, फ्लैग मार्च, जनगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और नारों के बीच याद किए गए नियोगी—आयोजकों के अनुसार 7 से 8 हजार लोग हुए शामिल

दल्ली राजहरा।
दल्ली राजहरा की पहचान केवल लौह अयस्क की खदानों और औद्योगिक नगरी के रूप में नहीं है। इस शहर की मिट्टी में मजदूरों के संघर्ष, शहादत, संगठन और सामाजिक निर्माण से जुड़ी एक लंबी कहानी भी दर्ज है। इसी इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में शंकर गुहा नियोगी का नाम आता है।

28 सितंबर 2026 को शंकर गुहा नियोगी का 35वां शहादत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ की ओर से दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में करीब 7 से 8 हजार लोग शामिल हुए। कांकेर, नारायणपुर, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद, दुर्ग और सारंगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से लोग दल्ली राजहरा पहुंचे।
दो दिनों तक नगर में लाल-हरे झंडों का ध्वजारोहण, फ्लैग मार्च, रैली, जनगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और आमसभा का सिलसिला चलता रहा। आयोजन में नियोगी की स्मृति के साथ दल्ली राजहरा के मजदूर आंदोलन से जुड़े इतिहास को भी याद किया गया।

एक महीने पहले से चल रही थी आयोजन की तैयारी
जन मुक्ति मोर्चा के बुलेटिन के अनुसार दो दिवसीय कार्यक्रम को लेकर संगठन से जुड़े साथी करीब एक महीने पहले से तैयारियों में जुटे थे। आयोजन की तैयारियों में भोजन, रैली, ध्वजारोहण, मार्ग व्यवस्था और बाहर से आने वाले लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं पर काम किया गया।
आयोजकों की ओर से कार्यक्रम को नियोगी की स्मृति के साथ-साथ उनके मजदूर आंदोलन और उससे जुड़े सामाजिक कार्यों को याद करने का अवसर बताया गया।

27 सितंबर को शहर और आसपास लहराए लाल-हरे झंडे
27 सितंबर की सुबह करीब 8 बजे दल्ली राजहरा के प्रमुख चौक-चौराहों और आसपास के गांवों में लाल-हरे झंडों का ध्वजारोहण किया गया।
शहीद वीर नारायण सिंह चौक, पुराना बाजार में हुए ध्वजारोहण कार्यक्रम में पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष रवि जैसवाल, पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष संतोष देवांगन, राजहरा व्यापारी संघ के रमेश मित्तल और समाजसेवी गिरवर साहू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
शाम करीब 4 बजे लाल-हरे झंडे के सम्मान में फ्लैग मार्च निकाला गया। जन मुक्ति मोर्चा कार्यालय से शुरू हुआ यह मार्च शहीद चौक, पुराना बाजार, महुआ चौक, शहीद वीर नारायण सिंह चौक, गुप्ता चौक, नियोगी चौक, नया बस स्टैंड, श्रमवीर चौक और जैन भवन चौक होते हुए माइंस ऑफिस चौक पहुंचा। इसके बाद मार्च जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ के कृषि कार्यालय पहुंचकर समाप्त हुआ।

28 सितंबर की सुबह से ही जुटने लगे लोग
28 सितंबर को मुख्य कार्यक्रम के दिन सुबह करीब 3 बजे से भोजन व्यवस्था की तैयारियां शुरू होने की जानकारी आयोजकों ने दी। भोजन प्रभारी नन्हा धनकर और साथियों ने व्यवस्था संभाली। आयोजकों के अनुसार सुबह करीब 11 बजे तक भोजन तैयार कर लिया गया था।
सबसे पहले राजनांदगांव क्षेत्र के ग्राम भोथीपार से साथियों की बस पहुंची। इसके बाद एक के बाद एक करीब 80 से 90 बसों के अलावा माजदा, पिकअप, बोलेरो, तूफान और अन्य वाहनों से लोग दल्ली राजहरा पहुंचते गए।
आयोजकों के अनुसार कांकेर, नारायणपुर, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद, दुर्ग और सारंगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से लोगों की भागीदारी रही। शहीद वीर मेला मैदान में करीब 7 से 8 हजार लोगों के पहुंचने का दावा आयोजकों ने किया।
दूर-दराज से आए लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। रैली मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर पानी और केले का वितरण किया गया।
आशा गुहा नियोगी की मौजूदगी में हुआ ध्वजारोहण
दोपहर करीब 3 बजे जन मुक्ति मोर्चा कार्यालय में आशा गुहा नियोगी, शंकर गुहा नियोगी के परिवार से जुड़े लोगों तथा छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा राजनांदगांव और भीम आर्मी सारंगढ़ से जुड़े साथियों की मौजूदगी में लाल-हरे झंडे का ध्वजारोहण किया गया।
इसके बाद वार्ड क्रमांक 13 स्थित शहीद वीर मेला मैदान से रैली की शुरुआत हुई।
शहीद वीर नारायण सिंह चौक पर माल्यार्पण, फिर बढ़ी रैली
रैली घोड़ा मंदिर, मनोहर ऑफिस चौक, महुआ चौक और पुराना बाजार होते हुए शहीद वीर नारायण सिंह चौक पहुंची। यहां शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पूजा-अर्चना की गई।
इसके बाद रैली मुख्य मार्ग से होते हुए आशा टॉकीज चौक पहुंची। यहां सुनील साहू और दिनेश कौशिक की ओर से रैली में शामिल लोगों के लिए पानी की व्यवस्था की गई।
इसके बाद रैली नगर के गुप्ता चौक पहुंची, जहां मांदरी और रिलो नृत्य की प्रस्तुति हुई।
रैली में इस दौरान विभिन्न नारे लगाए गए, जिनमें “इंकलाब जिंदाबाद”, “जन मुक्ति मोर्चा जिंदाबाद”, “लाल-हरा झंडा जिंदाबाद”, “कॉमरेड नियोगी को लाल सलाम” और “दल्ली राजहरा गोलीकांड के वीर शहीदों को लाल सलाम” जैसे नारे शामिल रहे।
इसके बाद रैली नियोगी चौक और नया बस स्टैंड पहुंची। यहां संतोष कोशी और उनके साथियों की ओर से पानी और केले का वितरण किया गया।
रैली श्रमवीर चौक होते हुए जैन भवन चौक पहुंची, जहां रैली आमसभा में परिवर्तित हो गई। सर्व आदिवासी समाज के साथियों की ओर से पानी और बिस्किट का वितरण किया गया।
जनगीत से शुरू हुई आमसभा
आमसभा की शुरुआत नवा बिहान के चंद्रशेखर यादव, रमित यादव, धर्मपाल, ललित गेडाम और साथियों द्वारा जनगीत की प्रस्तुति से हुई।
इसके बाद जन मुक्ति मोर्चा छत्तीसगढ़ के सचिव कॉमरेड बसंत रावटे ने अपनी बात रखी। संजीवनी अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ. राजीव लोचन ने हसदेव से जुड़े मुद्दे पर विचार रखे।
इसके अलावा कॉमरेड वीरेंद्र कुर्रे, दिलीप बघेल, गुप्तेश उसेंडी, सोमनाथ उइके, अशोक साहू, नीलिमा श्याम, शिव पोटई, मोहन ठाकुर, आशा गुहा नियोगी, श्रीमती गुहा और भगत साहू सहित विभिन्न वक्ताओं ने मंच से अपनी बातें रखीं। कार्यक्रम का संचालन कॉमरेड ईश्वर निर्मलकर ने किया।
कार्यक्रम में ये लोग भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जीत गुहा नियोगी और तंद्रा गुहा नियोगी सहित जन मुक्ति मोर्चा से जुड़े मूलचंद चंदेल, महेंद्र कुमार गंजिर, रूपा साहू, नवल चंद्राकर, चुरामणी देवांगन, भागवत दास, सुरेंद्र पांडे, पुसाराम साहू, यादराम कोर्राम, ईश्वर भुआर्य, जयसिंग दुग्गा, रोहित भंडारी, नरेश नायक, सरकार दादा, शंभू यादव, भोमराज, जीतू साहू, अनिल निर्मलकर, जीवन निर्मलकर और तरुण उर्वशा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष काशीराम निषाद, वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, रमेश मित्तल, पत्रकार नीलेश श्रीवास्तव, राजू विनायक और नरेंद्र ग्वाल सहित अन्य लोग भी पहुंचे।
खदानों से निकली मजदूर संघर्ष की कहानी
शंकर गुहा नियोगी का दल्ली राजहरा से जुड़ाव 1977 के दौर में मजबूत हुआ। शहीद अस्पताल के आधिकारिक इतिहास के अनुसार उस समय खदान मजदूर मजदूरी और काम की परिस्थितियों से जुड़े सवालों को लेकर संघर्ष कर रहे थे। मजदूरों ने नियोगी से संपर्क किया और उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ माइंस श्रमिक संघ का गठन हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी नियोगी को भिलाई-दुर्ग औद्योगिक क्षेत्र के मजदूर नेता के रूप में दर्ज किया गया है। फैसले में मजदूरों के वेतन, बोनस और छंटनी किए गए श्रमिकों की बहाली जैसे मुद्दों से जुड़े उनके आंदोलनों का उल्लेख मिलता है।
1977 की गोलीबारी में 11 मजदूरों की मौत
शहीद अस्पताल के आधिकारिक इतिहास के अनुसार 1977 में मजदूर आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में 11 मजदूरों की मौत हुई थी। इन्हीं मजदूरों की स्मृति में बाद में अस्पताल का नाम शहीद अस्पताल रखा गया।
संघर्ष के साथ निर्माण की अवधारणा
नियोगी से जुड़े आंदोलन के इतिहास में ‘संघर्ष और निर्माण’ की अवधारणा का उल्लेख मिलता है। मजदूरों के अधिकारों के सवालों के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, नशामुक्ति, तकनीकी प्रशिक्षण और सामाजिक जागरूकता जैसे विषय भी इससे जुड़े। शहीद अस्पताल के इतिहास में इन प्रयासों का उल्लेख है।
मजदूरों के श्रम से बना शहीद अस्पताल
शहीद अस्पताल के आधिकारिक इतिहास के अनुसार मजदूरों ने आर्थिक योगदान के साथ श्रमदान किया और निर्माण कार्य में स्वयं भाग लिया। अस्पताल की छत की ढलाई में एक दिन करीब 10 हजार मजदूरों के सामूहिक श्रम का भी उल्लेख मिलता है।
3 जून 1983 को अस्पताल का उद्घाटन हुआ और 1977 में मारे गए मजदूरों की स्मृति में इसका नाम शहीद अस्पताल रखा गया।
अस्पताल के माध्यम से मजदूर बस्तियों और आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता से जुड़े प्रयास भी आगे बढ़े।
नशामुक्ति, शिक्षा और सामाजिक सरोकार
शहीद अस्पताल के इतिहास में मजदूर आंदोलन के साथ शराब के खिलाफ अभियान, स्वास्थ्य जागरूकता, शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण जैसी गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। महिलाओं की भागीदारी के लिए महिला मुक्ति मोर्चा जैसी पहल भी इस इतिहास का हिस्सा रही।
मशीनीकरण और रोजगार का सवाल
दल्ली राजहरा के मजदूर आंदोलन से जुड़ी कहानी में खदानों के मशीनीकरण का सवाल भी महत्वपूर्ण रहा। तकनीकी बदलावों के बीच रोजगार और श्रमिकों के भविष्य को लेकर चिंताएं आंदोलन के मुद्दों में शामिल रहीं।
28 सितंबर 1991—नियोगी की हत्या
शंकर गुहा नियोगी की 28 सितंबर 1991 को भिलाई में हत्या हुई। शहीद अस्पताल के आधिकारिक इतिहास में भी इस घटना का उल्लेख है।
हत्या का मामला लंबी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरा। सुप्रीम कोर्ट के 20 जनवरी 2005 के फैसले में कहा गया कि हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पलटन मल्लाह की दोषसिद्धि बहाल करते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा दी, जबकि अन्य आरोपियों के संबंध में हाईकोर्ट के बरी किए जाने के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया गया।
इतिहास के पन्नों से दिलों तक—नियोगी की स्मृति
दल्ली राजहरा में आयोजित यह दो दिवसीय कार्यक्रम केवल रैली और आमसभा तक सीमित नहीं रहा। इसके साथ 1977 का मजदूर आंदोलन, 11 मजदूरों की मौत, शहीद अस्पताल का निर्माण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े प्रयास, नशामुक्ति अभियान, मशीनीकरण और रोजगार के सवाल तथा 1991 की हत्या के बाद चली न्यायिक प्रक्रिया जैसे कई ऐतिहासिक अध्याय भी जुड़े रहे।
इतिहास में कुछ नाम तारीखों और दस्तावेजों में दर्ज रह जाते हैं। कुछ नाम लोगों की स्मृतियों का हिस्सा बन जाते हैं और वर्षों बाद भी किसी शहर, किसी आंदोलन या किसी घटना की चर्चा के साथ सामने आते हैं।
दल्ली राजहरा में आयोजित这个 शहादत दिवस समारोह भी नियोगी की स्मृति को सार्वजनिक रूप से याद करने की एक कड़ी रहा।
शंकर गुहा नियोगी का नाम दल्ली राजहरा के मजदूर इतिहास, संघर्ष और निर्माण से जुड़ी स्मृतियों में आज भी दर्ज है।
जब तक यह शरीर है, जब तक यह जीवन है, जब तक सांसें चलती हैं—तब तक शहीद कॉमरेड शंकर गुहा नियोगी केवल इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि हम सबके दिलों में जिंदा रहेंगे।
समय बदलेगा, पीढ़ियां बदलेंगी, लेकिन दल्ली राजहरा की धरती से जुड़ी उनकी स्मृतियां और मजदूर आंदोलन की यह कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहेगी।
नियोगी की शहादत एक तारीख भर नहीं—दल्ली राजहरा में हर वर्ष होने वाला यह आयोजन उस स्मृति को सार्वजनिक रूप से जीवित रखने की एक कड़ी है।
इतिहास के पन्नों से लेकर हम सबके दिलों तक—नियोगी की स्मृति आज भी जिंदा है।




