बच्चों का भविष्य संवारने शिक्षक, पालक और विद्यार्थी आए साथ
पीएम श्री शासकीय प्राथमिक शाला गुण्डरदेही में बैठक आयोजित, बेहतर शिक्षा, अनुशासन, स्वास्थ्य और संस्कारों के लिए 10 बिंदुओं पर बनी सहमति

बच्चों का भविष्य संवारने शिक्षक, पालक और विद्यार्थी आए साथ
पीएम श्री शासकीय प्राथमिक शाला गुण्डरदेही में बैठक आयोजित, बेहतर शिक्षा, अनुशासन, स्वास्थ्य और संस्कारों के लिए 10 बिंदुओं पर बनी सहमति
गुण्डरदेही। बच्चों के बेहतर भविष्य और सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय के शिक्षकों के साथ पालकों का सहयोग भी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दशहरा अवकाश से पहले पीएम श्री शासकीय प्राथमिक शाला गुण्डरदेही में शिक्षक, पालक एवं विद्यार्थी बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में बच्चों की पढ़ाई, अनुशासन, अच्छी आदतों, स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बच्चों के घर पर पढ़ाई नहीं करने और बड़ों की बात नहीं मानने जैसी समस्याओं पर चिंतित पालकों ने अब बच्चों की पढ़ाई और व्यवहार पर विशेष ध्यान देने की सहमति जताई।
बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शिक्षादूत राजेन्द्र मारकण्डे ने कहा कि शासकीय स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवारने के लिए शिक्षक लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बेहतर परिणाम के लिए पालकों का सहयोग भी अपरिहार्य है। बच्चों की शिक्षा और उनके सर्वांगीण विकास में विद्यालय के साथ घर का वातावरण और पालकों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विद्यालय की प्रधानपाठक श्रीमती सविता यादव ने त्रैमासिक परीक्षा में बच्चों के प्रदर्शन तथा विद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी पालकों के सामने रखी। शिक्षाविद् एच.एल. बेलचंदन ने प्रधानपाठक सहित शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए पालकों से नियमित रूप से बैठकों में शामिल होने और घर पर बच्चों की पढ़ाई में अपेक्षित सहयोग देने की बात कही।
इस अवसर पर शिक्षादूत राजेन्द्र मारकण्डे ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया। वहीं, संगीत शिक्षक अनिल ठाकुर के मार्गदर्शन में बच्चों ने प्रेरणादायक गीत-संगीत प्रस्तुत किए। बैठक में उपस्थित शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों ने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए 10 बिंदुओं पर मिलकर काम करने की सहमति जताई।
बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए तय किए गए 10 बिंदु
1. बच्चों को आज्ञाकारी बनाना: पालक बच्चों को बड़ों का सम्मान करने, उनकी उचित बातों को मानने और अनुशासित रहने के लिए प्रेरित करेंगे।
2. घर पर नियमित पढ़ाई करवाना: बच्चों को विद्यालय में पढ़ाए गए पाठों का घर पर नियमित अभ्यास करवाया जाएगा। इसमें पालक अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करेंगे।
3. बच्चों को समय देना और कॉपियों की जांच: पालक नियमित रूप से बच्चों के लिए समय निकालेंगे, उनकी पढ़ाई की जानकारी लेंगे तथा उनकी कॉपियों में हस्ताक्षर कर पढ़ाई के प्रति उनकी नियमितता पर ध्यान देंगे।
4. पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण बनाना: घर में बच्चों की पढ़ाई के लिए निर्धारित स्थान पर पर्याप्त रोशनी और शांत वातावरण की व्यवस्था की जाएगी, ताकि बच्चे एकाग्र होकर पढ़ाई कर सकें।
5. खेलकूद और रुचि के अनुसार गतिविधियों का अवसर: बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलकूद और उनकी रुचि के अनुरूप अन्य गतिविधियों में भाग लेने का अवसर दिया जाएगा, जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास हो सके।
6. साफ-सफाई और आत्मनिर्भरता की आदत डालना: बच्चों को शरीर और कपड़ों की साफ-सफाई रखने के साथ अपने व्यक्तिगत कार्य स्वयं करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि उनमें स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित हो।
7. गलत आदतों से बचाने पर ध्यान: पालक बच्चों में गाली-गलौज, लड़ाई-झगड़े और नशे जैसी गलत आदतों पर विशेष ध्यान देंगे तथा उन्हें अच्छे व्यवहार और संस्कार अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे।
8. घर पर शैक्षिक मार्गदर्शन देना: पालक बच्चों को घर पर पढ़ाई से संबंधित अतिरिक्त मार्गदर्शन और सीखने के अवसर उपलब्ध कराएंगे, ताकि उनकी शैक्षणिक क्षमता में सुधार हो सके।
9. स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों से बचाना: बच्चों को स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक खाद्य पदार्थों के सेवन से बचाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए पालक बच्चों को अनावश्यक रूप से नगद पैसे देने से बचेंगे, ताकि वे ऐसे खाद्य पदार्थ खरीदने से दूर रहें।
10. मोबाइल और टीवी के उपयोग पर निगरानी: पालक बच्चों के मोबाइल और टीवी देखने के समय तथा उनके द्वारा देखी जाने वाली सामग्री पर निगरानी रखेंगे, जिससे बच्चे अनावश्यक स्क्रीन टाइम से बचें और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
बैठक में सहायक शिक्षक मधुजा यादव, पुणेश्वर साहू, नेहा गुप्ता, संगीत शिक्षक अनिल ठाकुर, खेल शिक्षक दानेश कुमार तथा पालक लोकेन्द्र महोबिया, लक्ष्मी बाई सहित बड़ी संख्या में पालक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।




