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तुयेगोंदी मुद्दे पर छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ की हुंकार, 40 सदस्यीय समिति के गठन का निर्णय

बालोद के जामडीपाठ में कथित अतिक्रमण पर जताया आक्रोश, बाजा बोर्ड, महुआ बोर्ड और शाकंभरी बोर्ड के गठन सहित कई मांगों को लेकर सरकार पर उपेक्षा का आरोप

तुयेगोंदी मुद्दे पर छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ की हुंकार, 40 सदस्यीय समिति के गठन का निर्णय

बालोद के जामडीपाठ में कथित अतिक्रमण पर जताया आक्रोश, बाजा बोर्ड, महुआ बोर्ड और शाकंभरी बोर्ड के गठन सहित कई मांगों को लेकर सरकार पर उपेक्षा का आरोप

रायपुर, 28 जून। गुरु घासीदास संस्कृति भवन में आयोजित छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ की बैठक में तुयेगोंदी पाटेश्वर धाम एवं बालोद जिले के जामडीपाठ क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में तुयेगोंदी प्रकरण के लिए 40 सदस्यीय समिति के गठन का निर्णय लिया गया। साथ ही विभिन्न समाजों के लिए अलग-अलग बोर्डों के गठन की मांग को लेकर सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया गया।
बैठक की शुरुआत इष्ट देव की पूजा-अर्चना से हुई। महासंघ के पदाधिकारियों ने बालोद जिले के जामडीपाठ स्थित आदिवासी समाज के पारंपरिक पूजा स्थल की भूमि पर कथित अवैध कब्जे को गंभीर विषय बताते हुए चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में बाहरी व्यक्तियों को जमीन बिक्री पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई।
बैठक में गाड़ा समाज के लिए बाजा बोर्ड, अघरिया पाल समाज के लिए भेड़ एवं ऊन संवर्धन बोर्ड, कलार समाज के लिए महुआ बोर्ड तथा शाकंभरी बोर्ड के गठन की मांग दोहराई गई।
सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि विनोद नागवंशी ने जामडीपाठ क्षेत्र में संरक्षित वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे, लंबित प्रशासनिक कार्रवाई तथा तुयेगोंदी में आदिवासियों के पारंपरिक आस्था स्थल जाम्हा बाबा और कैना से जुड़े मामलों की जानकारी दी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम ने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराओं और रीति-रिवाजों को समझने तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए शासन को ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने तुयेगोंदी क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण और वन भूमि पर कब्जे के मामलों में कार्रवाई नहीं होने पर चिंता व्यक्त करते हुए संगठन की एकजुटता पर जोर दिया।
पूर्व सांसद नंदकुमार साय ने कहा कि छत्तीसगढ़िया समाज को अन्याय के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करना होगा। वहीं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अकबर राम कोर्राम ने बस्तर क्षेत्र में जंगलों की कटाई और बाहरी लोगों द्वारा कथित कब्जों का मुद्दा उठाते हुए तुयेगोंदी क्षेत्र में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFRR) नहीं दिए जाने पर सवाल खड़े किए।
बैठक को संबोधित करते हुए विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने आदिवासी समाज के समर्थन की बात कही तथा तुयेगोंदी मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
कार्यक्रम का संचालन महासंघ के अध्यक्ष रमेश यदु ने किया। बैठक में पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री, विभिन्न समाजों के प्रदेश अध्यक्षों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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