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दल्ली राजहरा पैलेट प्लांट की लीज बाउंड्री पर बड़ा सवाल, आखिर बदलाव का आदेश किसका?
खदान मजदूर संघ ने नवनियुक्त CGM को सौंपा ज्ञापन; लीज सीमा, केंद्रीय वेतनमान और श्रमिक हितों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग

दल्ली राजहरा पैलेट प्लांट की लीज बाउंड्री पर बड़ा सवाल, आखिर बदलाव का आदेश किसका?
खदान मजदूर संघ ने नवनियुक्त CGM को सौंपा ज्ञापन; लीज सीमा, केंद्रीय वेतनमान और श्रमिक हितों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग
- दल्ली राजहरा। दल्ली यंत्रीकृत खदान परिसर में संचालित 1.2 MTPA पैलेट प्लांट की लीज बाउंड्री को लेकर खदान मजदूर संघ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। संघ ने पूछा है कि यदि लीज सीमा में बदलाव किया गया है, तो यह बदलाव किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश से हुआ? संघ ने संबंधित आदेश, अनुमति और दस्तावेज सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किए जाने की मांग की है।
15 सितंबर को खदान मजदूर संघ भिलाई संबद्ध भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद अंसारी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने नवनियुक्त मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार सिंह से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उनका स्वागत करते हुए पैलेट प्लांट से जुड़े श्रमिक हितों एवं अन्य मुद्दों को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
लीज बाउंड्री में बदलाव बना सबसे बड़ा सवाल
संघ ने ज्ञापन में लीज बाउंड्री में कथित बदलाव को प्रमुख मुद्दा बनाया है। संघ का कहना है कि पैलेट प्लांट की गतिविधियां खदान क्षेत्र से जुड़ी हैं। ऐसे में यदि लीज सीमा में कोई परिवर्तन किया गया है, तो उसके लिए जारी आदेश और सक्षम स्तर की अनुमति स्पष्ट होना जरूरी है।
संघ ने सवाल उठाया कि मूल लीज बाउंड्री क्या थी, उसमें बदलाव कब हुआ, किस अधिकारी या प्राधिकारी के आदेश से हुआ और इसके लिए किन विभागों से अनुमति ली गई? संघ ने पूरे रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
“जब पूरा संचालन खदान क्षेत्र से जुड़ा है, तो व्यवस्था अलग क्यों?”
संघ का दावा है कि पैलेट प्लांट की गतिविधियां खदान के लीज क्षेत्र से जुड़ी हैं तथा इसके संचालन में BSP से संबंधित जमीन, पानी, बिजली और खनिज सामग्री सहित विभिन्न संसाधनों की भूमिका है। संघ ने इसी आधार पर प्लांट की वर्तमान प्रशासनिक एवं श्रम व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
संघ ने उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर लीज क्षेत्र, प्लांट संचालन और श्रम व्यवस्था के बीच संबंधों की विस्तृत जांच की मांग की है।
RTI में 300 श्रमिकों के केंद्रीय लेबर लाइसेंस का हवाला
संघ ने उप मुख्य श्रम आयुक्त (केन्द्रीय), रायपुर से RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि जगन्नाथ स्टील प्लांट के नाम से 300 श्रमिकों के लिए केंद्रीय लेबर लाइसेंस जारी किया गया था, जिसकी वैधता 5 सितंबर 2026 तक बताई गई है।
संघ का कहना है कि इस जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पैलेट प्लांट में कार्यरत श्रमिकों पर कौन-सी श्रम एवं वेतन व्यवस्था लागू होती है।
केंद्रीय वेतनमान सहित वैधानिक लाभ की मांग
संघ ने श्रमिकों को केंद्रीय वेतनमान, VDA, EPF, ESIC और बोनस का लाभ देने तथा 1 अप्रैल 2026 से वेतन अंतर का भुगतान करने की मांग की है।
संघ का आरोप है कि वेतन व्यवस्था में बदलाव के कारण श्रमिकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। साथ ही जांच पूरी होने तक किसी भी श्रमिक की सेवा समाप्त नहीं किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
CVO-SAIL और CVC जांच की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए संघ ने CVO-SAIL एवं केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) स्तर पर जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन की प्रतियां केंद्रीय श्रम विभाग, BSP के संबंधित अधिकारियों तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।
संघ की प्रमुख मांगों में लीज बाउंड्री में कथित बदलाव की जांच, संबंधित आदेश एवं अनुमतियों की पड़ताल, केंद्रीय वेतनमान व वैधानिक लाभ दिलाना, वेतन अंतर का भुगतान, सतर्कता जांच तथा जांच अवधि में श्रमिकों की सेवा सुरक्षा शामिल हैं।
प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष महेंद्र साहू, कोषाध्यक्ष संतोष देवांगन सहित संघ के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।



