बच्चों के भविष्य की ‘कक्षा’ में खुद उतरीं कलेक्टर दिव्या मिश्रा, शिक्षा व्यवस्था की एक-एक कड़ी पर रखी पैनी नजर
खराब रिजल्ट पर जवाबदेही तय, 85% से कम उपस्थिति पर सख्ती; शिक्षक विहीन स्कूलों में संगवारी गुरुजी-मानसेवी शिक्षकों की तत्काल व्यवस्था—मेधावी से लेकर जरूरतमंद और बीमार बच्चों तक हर विद्यार्थी की चिंता

बच्चों के भविष्य की ‘कक्षा’ में खुद उतरीं कलेक्टर दिव्या मिश्रा, शिक्षा व्यवस्था की एक-एक कड़ी पर रखी पैनी नजर
खराब रिजल्ट पर जवाबदेही तय, 85% से कम उपस्थिति पर सख्ती; शिक्षक विहीन स्कूलों में संगवारी गुरुजी-मानसेवी शिक्षकों की तत्काल व्यवस्था—मेधावी से लेकर जरूरतमंद और बीमार बच्चों तक हर विद्यार्थी की चिंता
बालोद, 07 अगस्त 2026।“जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा से पीछे न रहे और किसी विद्यार्थी का भविष्य व्यवस्था की कमी के कारण प्रभावित न हो”—इसी सोच के साथ कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक साथ कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में बालोद एवं डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों के प्राचार्यों एवं शिक्षकों की बैठक में कलेक्टर ने शिक्षा गुणवत्ता की गहन समीक्षा करते हुए साफ संदेश दिया कि बच्चों के भविष्य के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सुबह 11 बजे से प्रथम पाली में बालोद विकासखण्ड तथा दोपहर 3 बजे से द्वितीय पाली में डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के प्राचार्यों एवं शिक्षकों के साथ हुई बैठक में कलेक्टर ने स्कूलवार जानकारी लेकर शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को समझा। उन्होंने केवल आंकड़े नहीं देखे, बल्कि उन आंकड़ों के पीछे विद्यार्थियों की पढ़ाई, उनकी उपस्थिति, कमजोर बच्चों की स्थिति और शिक्षकों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी गंभीरता से चर्चा की।
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसलिए शिक्षा के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने शिक्षा गुणवत्ता में सुधार और उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम के लिए सभी प्राचार्यों एवं शिक्षकों को ठोस एवं परिणाममूलक प्रयास करने के निर्देश दिए।
खराब रिजल्ट पर सीधे शिक्षकों से सवाल, जवाबदेही भी होगी तय
कलेक्टर ने शिक्षा सत्र 2025-26 में कक्षा 10वीं एवं 12वीं के स्कूलवार परीक्षा परिणामों की विस्तार से समीक्षा की। जिन विषयों का परीक्षा परिणाम संतोषप्रद नहीं रहा, उन विषयों के शिक्षकों को बैठक में तलब कर परिणाम कमजोर रहने का कारण पूछा गया।
उन्होंने प्राचार्यों एवं शिक्षकों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि परीक्षा परिणाम खराब या संतोषप्रद नहीं होने पर संबंधितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी को संबंधित प्राचार्यों एवं शिक्षकों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
संदेश साफ था—बच्चों की मेहनत का परिणाम कमजोर रहा तो जिम्मेदारी भी तय होगी।
85 प्रतिशत से कम उपस्थिति नहीं, हर बच्चे को स्कूल तक लाने की जिम्मेदारी
कलेक्टर ने जून एवं जुलाई माह में विद्यार्थियों की स्कूलवार उपस्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी स्थिति में विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से कम नहीं होनी चाहिए।
कम उपस्थिति को लेकर कार्रवाई की चेतावनी देने के साथ ही उन्होंने समस्या का समाधान भी बताया। पालकों के साथ नियमित बैठक आयोजित करने, बच्चों की पढ़ाई को लेकर उन्हें समझाइश देने और पालकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए।
कलेक्टर की सोच केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रही। उन्होंने बच्चे स्कूल क्यों नहीं आ रहे हैं, उनकी पढ़ाई में क्या परेशानी है और पालकों को किस तरह जोड़ा जाए, इस दिशा में भी प्राचार्यों एवं शिक्षकों को काम करने की जिम्मेदारी दी।
जहां शिक्षक नहीं, वहां बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी
शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों को लेकर कलेक्टर ने बेहद संवेदनशील और व्यावहारिक निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
डीएमएफ प्रभावित क्षेत्रों की शालाओं में डीएमएफ के माध्यम से संगवारी गुरुजी की शीघ्र नियुक्ति की जाएगी। वहीं डीएमएफ प्रभावित क्षेत्र के बाहर के विद्यालयों में शाला विकास समिति के माध्यम से मानसेवी शिक्षकों की नियुक्ति करने के निर्देश दिए गए।
शिक्षकों की कमी को देखते हुए कलेक्टर ने विशेष रूप से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवारीकला एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सांकरा में शीघ्र संगवारी गुरुजी की नियुक्ति करने के निर्देश दिए।
यह फैसला उन विद्यार्थियों के लिए राहत की बड़ी खबर है, जिन्हें विषय शिक्षकों की कमी के कारण नियमित पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हर शिक्षक एक बच्चे की जिम्मेदारी उठाएगा, कमजोर बच्चों पर विशेष नजर
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने शिक्षा सुधार की जिम्मेदारी केवल प्राचार्यों तक सीमित नहीं रखी। उन्होंने सभी प्राचार्यों एवं शिक्षकों को एक-एक बच्चे को गोद लेकर उसके परीक्षा परिणाम में सुधार के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विद्यालयों के मेधावी बच्चों की पहचान कर उनके परिणाम को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने को कहा।
इस पहल का उद्देश्य यही है कि कक्षा में पीछे रह जाने वाला बच्चा भी शिक्षक की व्यक्तिगत निगरानी और मार्गदर्शन से आगे बढ़ सके।
गरीब मेधावी बच्चों की उच्च शिक्षा में भी प्रशासन बनेगा सहारा
कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट अंक अर्जित करने वाले गरीब एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी कलेक्टर ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए स्पॉन्सरशिप योजना के माध्यम से शिक्षण शुल्क एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
इसके अलावा जरूरतमंद मेधावी विद्यार्थियों को सीएसआर एवं डीएमएफ के माध्यम से भी मदद उपलब्ध कराने की बात कही।
यानी प्रशासन की चिंता केवल बच्चे को 12वीं तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि उसके आगे के सपनों को भी सहारा देने की है।
बीमार बच्चों के इलाज की भी जिम्मेदारी, कोई बच्चा मजबूरी में पीछे न छूटे
गंभीर बीमारियों से ग्रसित विद्यार्थियों को आरबीएस यानी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की जानकारी भी कलेक्टर ने दी।
उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों, प्राचार्यों एवं शिक्षकों को ऐसे बच्चों को चिन्हित कर समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि जरूरतमंद विद्यार्थियों को समय पर उपचार और आवश्यक सहायता मिल सके।
बालिका शौचालय से लेकर अतिरिक्त कक्ष तक, स्कूलों की सुविधाओं पर भी फोकस
कलेक्टर ने स्कूलों की अधोसंरचना की भी स्कूलवार समीक्षा की। आवश्यकतानुसार जिला खनिज न्यास निधि एवं वीबी जीरामजी योजना से अतिरिक्त कक्ष, बालिका शौचालय एवं आहता निर्माण के लिए तत्काल प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि हर विद्यालय में बालिका शौचालय की सुविधा होना अत्यंत आवश्यक है। जिन स्कूलों में बालिका शौचालय उपलब्ध नहीं है, वहां तत्काल प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए।
बच्चों को नशे से बचाना भी प्रशासन की प्राथमिकता
विद्यार्थियों को नशापान से दूर रखने के लिए भी कलेक्टर ने विद्यालय स्तर पर समुचित उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे से दूर रखना हम सभी का सामाजिक उत्तरदायित्व है। शिक्षा के साथ बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी समाज और प्रशासन की साझा जिम्मेदारी है।
शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने पर भी सख्ती
कलेक्टर ने विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और अध्यापन कार्य की भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने तथा समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराने के लिए शिक्षकों को निर्धारित समयावधि में अपने दायित्वों का निर्वहन करना आवश्यक है।
उन्होंने सभी प्राचार्यों को किसी भी शिक्षक-शिक्षिका का 15 दिन से अधिक का संतान पालन अवकाश स्वयं स्वीकृत नहीं करने के निर्देश दिए। 15 दिन से अधिक अवकाश के आवेदन प्राप्त होने पर उसे जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा।
सख्ती भी, संवेदनशीलता भी—कलेक्टर की कार्यशैली में दोनों का संतुलन
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा की इस बैठक में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक स्पष्ट तस्वीर सामने आई—लापरवाही पर सख्ती और जरूरतमंद बच्चे के लिए संवेदनशीलता।
जहां खराब परीक्षा परिणाम पर जवाबदेही तय करने और 85 प्रतिशत से कम उपस्थिति पर कार्रवाई की बात कही गई, वहीं शिक्षक विहीन स्कूलों में वैकल्पिक शिक्षक, गरीब मेधावी बच्चों की उच्च शिक्षा, गंभीर बीमार विद्यार्थियों का निःशुल्क उपचार और बालिकाओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को लेकर तत्काल कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए।
यही संतुलन इस पहल को महज एक समीक्षा बैठक से आगे ले जाता है।
पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता के लिए शिक्षा विभाग को धन्यवाद
कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने शिक्षा विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारियों को गत 30 जुलाई को जिला प्रशासन द्वारा आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने तथा पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन के पुनीत कार्य में योगदान देने के लिए हृदय से धन्यवाद भी ज्ञापित किया।
बालोद की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश
कलेक्टर की इस पहल में एक बात स्पष्ट रूप से दिखाई देती है—शिक्षा व्यवस्था को केवल परीक्षा और अंक तक सीमित न रखकर विद्यार्थी के संपूर्ण भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
कमजोर विद्यार्थी को व्यक्तिगत मार्गदर्शन, मेधावी विद्यार्थी को आगे बढ़ने का अवसर, गरीब बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए सहायता, बीमार बच्चे को उपचार, शिक्षक विहीन स्कूल को शिक्षक और प्रत्येक विद्यार्थी को नियमित स्कूल पहुंचाने की कोशिश—इन सभी पहलुओं को एक साथ जोड़कर जिला प्रशासन शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
पालकों और विद्यार्थियों के लिए यह पहल इसलिए भी उम्मीद जगाती है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा, बेहतर मार्गदर्शन और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन गंभीरता से काम कर रहा है।
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा का संदेश स्पष्ट है—बालोद जिले के किसी भी बच्चे का भविष्य संसाधनों की कमी, शिक्षक की कमी या व्यवस्था की लापरवाही के कारण प्रभावित नहीं होना चाहिए। यही सोच जिले की शिक्षा व्यवस्था में आने वाले बदलाव की मजबूत नींव बन सकती है।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी श्री दीपक दुबे, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, दोनों विकासखण्डों के हाईस्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षक तथा संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।




