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पैलेट प्लांट में केंद्रीय वेतनमान पर घमासान, श्रमिकों के हक पर उठे गंभीर सवाल

जगन्नाथ स्टील प्लांट पर केंद्रीय श्रम लाइसेंस के बावजूद ठेका श्रमिकों को केंद्रीय वेतन से वंचित करने का आरोप; खदान मजदूर संघ ने श्रम एवं उद्योग मंत्री को सौंपा ज्ञापन, लीज बाउंड्री बदलने के आदेश की जांच की मांग

पैलेट प्लांट में केंद्रीय वेतनमान पर घमासान, श्रमिकों के हक पर उठे गंभीर सवाल

जगन्नाथ स्टील प्लांट पर केंद्रीय श्रम लाइसेंस के बावजूद ठेका श्रमिकों को केंद्रीय वेतन से वंचित करने का आरोप; खदान मजदूर संघ ने श्रम एवं उद्योग मंत्री को सौंपा ज्ञापन, लीज बाउंड्री बदलने के आदेश की जांच की मांग

दल्ली राजहरा। दल्ली यंत्रीकृत खदान के भीतर संचालित 1.2 एमटीपीए पैलेट प्लांट में ठेका श्रमिकों के वेतनमान को लेकर विवाद अब सरकार के दरवाजे तक पहुंच गया है। खदान मजदूर संघ भिलाई, संबद्ध भारतीय मजदूर संघ ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय श्रम लाइसेंस होने के बावजूद प्लांट में कार्यरत ठेका श्रमिकों को केंद्रीय वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा है। संघ ने इस पूरे मामले में गंभीर अनियमितताओं की जांच की मांग करते हुए छत्तीसगढ़ के श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन को ज्ञापन सौंपा है।
संघ के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद अंसारी के अनुसार, 24 सितंबर को भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय मंत्री राधेश्याम जायसवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री से नवा रायपुर स्थित उनके निवास पर मुलाकात की। ज्ञापन में पैलेट प्लांट की स्थिति, केंद्रीय श्रम लाइसेंस, लीज बाउंड्री, श्रमिकों के वेतन और अन्य श्रम संबंधी मुद्दों की जांच की मांग रखी गई।
RTI ने खड़े किए सवाल, 300 श्रमिकों का केंद्रीय लाइसेंस
संघ ने कार्यालय उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) से प्राप्त RTI जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि जगन्नाथ स्टील प्लांट के नाम 300 श्रमिकों का केंद्रीय श्रम लाइसेंस जारी हुआ था, जिसकी वैधता 5 सितंबर 2026 तक थी। संघ का कहना है कि इसी तथ्य के आधार पर यह सवाल उठता है कि यदि केंद्रीय श्रम लाइसेंस लिया गया था, तो संबंधित श्रमिकों के वेतन निर्धारण में केंद्रीय व्यवस्था को लेकर स्थिति क्या थी?
ज्ञापन में RTI जवाब पत्र क्रमांक RP-99(11)/2026-27-RTI, दिनांक 03.06.2026, केंद्रीय श्रम लाइसेंस दिनांक 06.09.2023 तथा अन्य दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है।
“सब कुछ BSP का, फिर वेतन व्यवस्था पर सवाल क्यों?”
संघ ने दावा किया है कि पैलेट प्लांट राजहरा हिल लीज क्षेत्र के भीतर संचालित है तथा प्लांट से संबंधित पर्यावरणीय स्वीकृति, जमीन, पानी, बिजली और मटेरियल सहित विभिन्न संसाधनों में BSP की भूमिका है। संघ के अनुसार, कंपनी द्वारा निवेश कर पैलेट तैयार किया जाता है और उसे BSP को ही उपलब्ध कराया जाता है।
इसी आधार पर संघ ने प्लांट की वास्तविक कानूनी एवं प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संघ का दावा है कि यह व्यवस्था स्वतंत्र फैक्ट्री के बजाय BOT/MDO मॉडल के अनुरूप है। हालांकि, इन दावों की अंतिम स्थिति संबंधित सक्षम विभागों की जांच और आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होगी।
लीज बाउंड्री बदलने का मुद्दा फिर गरमाया
ज्ञापन में सबसे प्रमुख सवाल लीज बाउंड्री में कथित बदलाव को लेकर उठाया गया है। संघ ने आरोप लगाया है कि लीज सीमा में बदलाव किया गया, लेकिन इसके सक्षम आदेश, अनुमति अथवा संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
संघ ने मांग की है कि लीज बाउंड्री बदलने के आदेश की प्रति सार्वजनिक कर इसकी वैधानिकता की जांच की जाए।
12 घंटे काम और भुगतान को लेकर भी लगाए आरोप
संघ ने आरोप लगाया कि पैलेट प्लांट के निर्माण के समय श्रमिकों से 12-12 घंटे काम कराया जाता था और भुगतान को लेकर भी शिकायतें थीं। संघ का कहना है कि उस दौरान BSP के श्रम अधिकारियों की निगरानी में श्रमिकों के भुगतान से संबंधित प्रक्रिया होती थी और ठेकेदारों को भुगतान के लिए NOC जारी किए जाते थे।
इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक जांच की मांग संघ ने की है।
स्थानीय और आदिवासी श्रमिकों से भेदभाव का भी आरोप
मुश्ताक अहमद ने कंपनी के कुछ सुपरवाइजरों पर स्थानीय एवं आदिवासी श्रमिकों के साथ कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार का भी आरोप लगाया। संघ का दावा है कि स्थानीय श्रमिकों की तुलना में बाहर से आए कुछ श्रमिकों को अधिक सुविधाएं और वेतन दिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
इसके साथ ही कंपनी में भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाते हुए स्थानीय स्तर पर भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है। वाहन चालकों की स्थानीय भर्ती को लेकर पूर्व में हुई बैठक में बनी सहमति के पालन की भी मांग उठाई गई है।
संघ की चार प्रमुख मांगें
संघ ने सरकार के समक्ष प्रमुख रूप से—
लीज बाउंड्री बदलने से संबंधित आदेश की प्रति तलब कर उसकी वैधानिकता की जांच।
पैलेट प्लांट के श्रमिकों को 01 अप्रैल 2026 से लागू केंद्रीय वेतन, VDA, EPF, ESIC एवं बोनस तथा कथित वेतन अंतर का भुगतान।
पूरे मामले की CVO-SAIL/CVC स्तर से सतर्कता जांच।
जांच पूरी होने तक किसी भी श्रमिक को नौकरी से नहीं हटाने।
की मांग रखी है।
अब नजर सरकार की जांच पर
केंद्रीय श्रम लाइसेंस, पैलेट प्लांट की लीज स्थिति, वेतनमान और लीज बाउंड्री में कथित बदलाव जैसे मुद्दों को लेकर संघ द्वारा मंत्री को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद मामला गंभीर प्रशासनिक जांच की मांग तक पहुंच गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इन दावों और दस्तावेजों की जांच के बाद पैलेट प्लांट की वास्तविक कानूनी स्थिति और श्रमिकों के वेतनमान को लेकर क्या निर्णय लेते हैं।

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