28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस: बालोद जिले में लगेगा एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन शिविर
रेबीज से बचाव को लेकर जनजागरूकता अभियान, पशु चिकित्सालयों में होगा टीकाकरण—पालतू पशुओं का समय पर टीकाकरण कराने की अपील

28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस: बालोद जिले में लगेगा एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन शिविर
रेबीज से बचाव को लेकर जनजागरूकता अभियान, पशु चिकित्सालयों में होगा टीकाकरण—पालतू पशुओं का समय पर टीकाकरण कराने की अपील समय सुबह 8 बजे से 1 बजे तक
बालोद। 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर पशु चिकित्सा एवं पशु पालन विभाग, जिला बालोद द्वारा पशुओं और आम जनता को रेबीज सहित विभिन्न पशुजनित बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पशुओं की बीमारी का सीधा असर उनके स्वास्थ्य, पशुपालकों की आर्थिक स्थिति और कई मामलों में मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। इसलिए बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर पशु चिकित्सक से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
रेबीज क्यों है गंभीर?
रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित स्तनधारी पशु की लार के माध्यम से फैल सकती है। कुत्ते इसके संक्रमण का प्रमुख स्रोत हैं, लेकिन अन्य संक्रमित स्तनधारी पशु भी संक्रमण फैला सकते हैं। काटने, खरोंचने अथवा संक्रमित लार के घाव या शरीर के संवेदनशील हिस्से के संपर्क में आने पर जोखिम हो सकता है।
पशु के काटने या खरोंचने पर तुरंत करें ये काम
पहला कदम: घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं।
दूसरा कदम: घाव को कसकर बांधने या घरेलू नुस्खे लगाने से बचें।
तीसरा कदम: बिना देरी किए स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सकीय सलाह लें।
चौथा कदम: डॉक्टर द्वारा बताई गई रेबीज वैक्सीन/अन्य आवश्यक उपचार प्रक्रिया पूरी करें।
ध्यान रखें—लक्षण आने का इंतजार करना खतरनाक हो सकता है।
पालतू पशुओं का टीकाकरण जरूरी
कुत्ते, बिल्ली सहित ऐसे पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराएं जिनमें रेबीज का जोखिम हो सकता है। पशु के टीकाकरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और पशु को अनजान या संदिग्ध जानवरों के संपर्क में आने से बचाएं।
मौसम बदलते ही बढ़ती हैं पशुओं की परेशानियां
बारिश, गर्मी और ठंड के मौसम में पशुओं में अलग-अलग प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। गंदा या जमा पानी, अत्यधिक गर्मी, ठंड, नमी, कीचड़, मक्खी-मच्छर और परजीवी पशुओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
पशुपालकों को चाहिए कि पशुओं को स्वच्छ पानी, संतुलित आहार, साफ और सूखा आश्रय उपलब्ध कराएं। बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें और लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से जांच कराएं।
दूसरे पशुओं से संक्रमण का खतरा
एक ही स्थान पर कई पशुओं को रखने पर संक्रमित पशु से दूसरे पशुओं में बीमारी फैलने का खतरा हो सकता है। इसलिए पशुशाला की सफाई, बीमार पशु का पृथक्करण, उपकरणों की स्वच्छता और नियमित टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है।
किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज?
पशु में लगातार बुखार, खाना-पीना छोड़ना, अत्यधिक कमजोरी, असामान्य व्यवहार, मुंह से अत्यधिक लार आना, निगलने में परेशानी, चलने में असामान्यता, अचानक आक्रामकता या असामान्य डर, लगातार खांसी/दस्त अथवा शरीर पर घाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो स्वयं दवा देने के बजाय पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
मक्खी-मच्छर और परजीवियों से भी बचाएं
पशुओं के शरीर पर टिक, जूं और अन्य परजीवी उनकी सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। पशुशाला की नियमित सफाई करें, नमी और गंदगी जमा न होने दें तथा पशु चिकित्सक की सलाह से उचित उपचार कराएं।
बीमार पशु को न छिपाएं, न छोड़ें
किसी पशु में गंभीर या संक्रामक बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो उसे खुले में छोड़ना समस्या को बढ़ा सकता है। पशु को सुरक्षित रूप से अलग रखकर पशु चिकित्सा विशेषज्ञ से संपर्क करना सबसे सुरक्षित कदम है।
28 सितंबर को विशेष एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन शिविर
पशु चिकित्सा एवं पशु पालन विभाग, जिला बालोद के अनुसार 28 सितंबर को जिले के पशु चिकित्सालयों में एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन शिविर आयोजित किए जाएंगे। सभी निकाय क्षेत्रों में मुनादी के माध्यम से लोगों को शिविर की जानकारी देने और अधिक से अधिक पशुओं के टीकाकरण के लिए जागरूक करने की बात कही गई है।
जनसंवाद न्यूज की जनहित में अपील
पशु स्वस्थ रहेगा तो परिवार सुरक्षित रहेगा।
पशुओं का समय पर टीकाकरण कराएं, साफ-सफाई रखें, बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और किसी भी गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ पशु चिकित्सक की सलाह लें।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क:
डॉ. पी.एल. साहू
पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ
📞 9893303668
जनसंवाद न्यूज
“जनहित में जागरूकता, जनहित में खबर”




