बाल संस्कार केंद्र में बच्चों ने सजाई आरती की थाली, कलश और शुभ-लाभ तोरण
शारदीय नवरात्रि पर प्रतियोगिता का आयोजन, बच्चों ने उत्साह से लिया भाग; सनातन संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना उद्देश्य

बाल संस्कार केंद्र में बच्चों ने सजाई आरती की थाली, कलश और शुभ-लाभ तोरण
शारदीय नवरात्रि पर प्रतियोगिता का आयोजन, बच्चों ने उत्साह से लिया भाग; सनातन संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना उद्देश्य
बालोद। शारदीय नवरात्रि महापर्व के द्वितीय दिवस पर बालोद नगर के कपिलेश्वर मंदिर प्रांगण में संचालित श्री सीताराम बाल संस्कार केंद्र में बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसमें आरती की थाली व दीप सजाओ, कलश-नारियल सजाओ और शुभ-लाभ तोरण बनाओ प्रतियोगिताएं शामिल रहीं। बच्चों ने पूरे उत्साह और लगन के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य बच्चों में सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के प्रति रुचि एवं जागरूकता विकसित करना था। केंद्र की संचालिका श्रीमती पूजा जैन ने बताया कि धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्र में प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को बच्चे हनुमान चालीसा पाठ, राम स्तुति और देशभक्ति गीतों जैसी गतिविधियों में भाग लेते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने हनुमान चालीसा का पाठ और राम स्तुति भी प्रस्तुत की। पुरस्कार वितरण कपिलेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री दिनेश साहू, श्री मदन सोनबरसा, मंदिर के पुजारी क्रांति दुबे तथा मातृशक्ति दीदी एतकुंवर साहू और खेदी साहू के हाथों कराया गया। कार्यक्रम का आयोजन केंद्र की संचालिका श्रीमती पूजा जैन एवं केंद्र सहयोगी बाल मंदिर की अध्यापिका श्रीमती रानी योगी के सहयोग से किया गया।
प्रतियोगिता के विजेता
- आरती की थाली एवं दीप सजाओ: प्रथम – तारुसी साहू, द्वितीय – पीहू साहू, तृतीय – विक्षा देवांगन।
- कलश-नारियल सजाओ: प्रथम – त्रियांश साहू, द्वितीय – डाली साहू, तृतीय – चेतांजलि साहू।
- शुभ-लाभ तोरण बनाओ: प्रथम – योगेंद्र साहू, द्वितीय – कुलदीप साहू, तृतीय – शयांक साहू।
बाल संस्कार केंद्र का ध्येय वाक्य “सेवा, सुरक्षा, संस्कार” है। केंद्र का उद्देश्य बच्चों को संस्कारवान बनाकर उनमें देशप्रेम, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रहित में कार्य करने की भावना विकसित करना है, ताकि वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बन सकें।




