पत्रकारों से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर बवाल, संगठन ने उठाई जांच की मांग
गुंडरदेही नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन के खिलाफ पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति ने PMO, SSP दुर्ग और कलेक्टर को सौंपा शिकायत पत्र

पत्रकारों से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर बवाल, संगठन ने उठाई जांच की मांग
गुंडरदेही नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन के खिलाफ पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति ने PMO, SSP दुर्ग और कलेक्टर को सौंपा शिकायत पत्र
दुर्ग/भिलाई। पत्रकारों से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर मामला गरमा गया है। पत्रकार सुरक्षा सेवा समिति ने गुंडरदेही नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन के सोशल मीडिया अकाउंट पर किए गए कथित पोस्ट को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। संगठन का आरोप है कि इन पोस्टों से भिलाई एवं आसपास के पत्रकारों की सामाजिक और व्यावसायिक छवि प्रभावित होने की स्थिति बनी है।
मामले को लेकर समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दुर्ग एवं कलेक्टर दुर्ग को शिकायत पत्र सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
सोशल मीडिया पोस्ट बने विवाद का केंद्र
शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया पर पत्रकारों को लेकर किए गए कथित पोस्ट को संगठन ने आपत्तिजनक एवं भ्रामक बताया है। समिति का कहना है कि किसी भी पत्रकार के संबंध में लगाए गए आरोपों अथवा प्रकाशित सामग्री की सत्यता की जांच संबंधित स्तर पर होना जरूरी है।
चखना सेंटर विवाद का भी शिकायत में जिक्र
समिति ने शिकायत में एक कथित चखना सेंटर से संबंधित विवाद का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया है कि इसी मामले के संदर्भ में पत्रकारों को सोशल मीडिया के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
“तथ्य सामने आएं, दोष तय नहीं” — जांच की मांग
पत्रकार संगठन ने प्रशासन से सोशल मीडिया पोस्ट, उसके स्रोत, संदर्भ और उसमें किए गए दावों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जांच के बाद यदि किसी प्रकार का नियम या कानून का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
समिति ने यह भी कहा है कि यदि मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन आगे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सकता है।
जनसंवाद न्यूज की ओर से स्पष्ट किया जाता है कि यह समाचार संगठन द्वारा प्रस्तुत शिकायत एवं उसमें लगाए गए आरोपों के आधार पर है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अथवा दोष का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच/सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्ष के बाद ही माना जाएगा।




