नेवारी कला के विकास की खुल गई पोल! नदी गंदगी से बजबजा रही, सड़क कीचड़ में धंसी—ग्रामीण बोले: अब तो जाग जाओ सरकार!
बारिश आई तो गांव की सड़क बनी दलदल, बच्चे फिसल रहे, किसान जूझ रहे, मरीजों की जान पर बन रही… तांदुला नदी की बदहाली ने भी बढ़ाई आफत
नेवारी कला के विकास की खुल गई पोल! नदी गंदगी से बजबजा रही, सड़क कीचड़ में धंसी—ग्रामीण बोले: अब तो जाग जाओ सरकार!
बारिश आई तो गांव की सड़क बनी दलदल, बच्चे फिसल रहे, किसान जूझ रहे, मरीजों की जान पर बन रही… तांदुला नदी की बदहाली ने भी बढ़ाई आफत
बालोद। नेवारी कला में इन दिनों विकास की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है, जिसे देखकर गांव के लोग भी कह रहे हैं—“आखिर हमारी सुनने वाला कौन है?” एक तरफ तांदुला नदी गंदगी और बदबू से बेहाल है, दूसरी तरफ अधूरी सड़क ने बारिश के मौसम में ग्रामीणों की हालत खराब कर दी है।
सड़क पर कदम रखो तो पैर कीचड़ में, नदी के पास जाओ तो नाक पर हाथ!
अधूरी सड़क पर बारिश का पानी और कीचड़ जमा होने से रास्ते पर चलना दूभर हो गया है। स्कूली बच्चे फिसलते-संभलते स्कूल पहुंच रहे हैं, किसान अपनी उपज लेकर निकलने में परेशान हैं और रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं किसी बीमार या बुजुर्ग को अस्पताल ले जाना हो तो ग्रामीणों के लिए यह रास्ता किसी आफत से कम नहीं।
तांदुला नदी का हाल देखकर भी क्या नहीं खुलेंगी जिम्मेदारों की आंखें?
नदी के आसपास गंदगी और जमा पानी से बदबू फैल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सफाई नहीं हुई तो बरसात में हालात और बिगड़ सकते हैं। गंदगी और जलभराव से बीमारी फैलने का खतरा भी बना हुआ है।
ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या को लेकर कई बार जिम्मेदारों को बताया गया, लेकिन सड़क की हालत जस की तस और नदी की गंदगी भी वैसी ही!
ग्रामीणों का सीधा सवाल—“साहब, विकास भाषण में होगा या गांव की सड़क पर भी दिखेगा?”
नेवारी कला के लोगों का कहना है कि उन्हें अब कागजी कार्रवाई और आश्वासन नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए पक्की सड़क, साफ नदी और राहत की जिंदगी।
अब देखना यह है कि ग्रामीणों की यह आवाज जिम्मेदार अधिकारियों के कानों तक कब पहुंचेगी और नेवारी कला की सड़क से कीचड़ तथा तांदुला नदी से गंदगी कब हटेगी?
क्योंकि सवाल सीधा है—जब जनता परेशान है, तो आखिर जिम्मेदारों की नींद कब टूटेगी?




