ऑयल पाम के साथ तिल की खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
डुड़िया अनुसंधान प्रक्षेत्र में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम, वैज्ञानिकों ने सिखाई उन्नत बीज उत्पादन की तकनीक

ऑयल पाम के साथ तिल की खेती से बढ़ेगी किसानों की आमदनी
डुड़िया अनुसंधान प्रक्षेत्र में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम, वैज्ञानिकों ने सिखाई उन्नत बीज उत्पादन की तकनीक
अर्जुन्दा। किसानों की आय बढ़ाने और खेती में विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में डुड़िया अनुसंधान प्रक्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, अर्जुन्दा-बालोद के अनुसंधान प्रक्षेत्र में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–ऑयल पाम के अंतर्गत ऑयल पाम के साथ अंतरवर्तीय फसल के रूप में तिल के वैज्ञानिक बीज उत्पादन पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
खाली जमीन बनेगी अतिरिक्त कमाई का जरिया
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऑयल पाम की कतारों के बीच उपलब्ध रिक्त स्थान का बेहतर उपयोग कर अतिरिक्त उत्पादन और आय प्राप्त करने के वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराना था। विशेषज्ञों ने बताया कि ऑयल पाम के साथ तिल की अंतरवर्तीय खेती अपनाकर किसान कम अवधि में अतिरिक्त फसल प्राप्त कर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।
बीज उत्पादन की बारीकियां समझीं किसानों ने
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्रायोगिक खेत का भ्रमण कराया और तिल के उन्नत बीज का चयन, उचित बुआई दूरी, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा वैज्ञानिक बीज उत्पादन की तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि राज्य बीज निगम के माध्यम से बीज उत्पादन करने वाले किसानों को बाजार की कीमतों पर निर्भरता कम होती है तथा निर्धारित मूल्य पर बीज का विक्रय किया जा सकता है। कार्यक्रम में तिल के वर्तमान न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹10,346 प्रति क्विंटल की जानकारी भी किसानों को दी गई।
ऑयल पाम के साथ तिल का मॉडल बनेगा नई मिसाल
महाविद्यालय के अधिष्ठाता एवं सहायक प्राध्यापकों ने कहा कि खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन–ऑयल पाम महत्वपूर्ण पहल है। बालोद जिले में ऑयल पाम के साथ तिल की अंतरवर्तीय खेती का मॉडल किसानों के लिए अतिरिक्त आय, कृषि विविधीकरण और बेहतर संसाधन उपयोग का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम में क्षेत्र के किसान भाइयों के साथ महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की। प्रशिक्षण के अंत में किसानों ने खेती से संबंधित सवाल पूछे, जिनका कृषि विशेषज्ञों ने मौके पर ही व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक समाधान दिया।
कार्यक्रम में अधिष्ठाता डॉ. यू. बी. देशमुख, डॉ. पायल देवी चंद्राकर, डॉ. निशा ठाकुर, डॉ. नमिता सिंग सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं अतिथि उपस्थित रहे।




