श्रम ही साधना, श्रमिक ही राष्ट्र निर्माण की ताकत: मुश्ताक अहमद
विश्वकर्मा जयंती पर खदान मजदूर संघ कार्यालय में पूजा-अर्चना, श्रमिक अधिकारों से लेकर AI और बदलते रोजगार तक उठे महत्वपूर्ण मुद्दे

श्रम ही साधना, श्रमिक ही राष्ट्र निर्माण की ताकत: मुश्ताक अहमद
विश्वकर्मा जयंती पर खदान मजदूर संघ कार्यालय में पूजा-अर्चना, श्रमिक अधिकारों से लेकर AI और बदलते रोजगार तक उठे महत्वपूर्ण मुद्दे
बालोद। विश्वकर्मा जयंती एवं राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर खदान मजदूर संघ भिलाई के कार्यालय में पूजा-अर्चना एवं कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री एवं खदान मजदूर संघ भिलाई के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद ने श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रम केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा से जुड़ी साधना है।
मुश्ताक अहमद ने कहा कि 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती को राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य भारतीय श्रम संस्कृति और श्रमिकों के योगदान को सम्मान देना है। श्रमिक, उद्योग और राष्ट्र को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग मजबूत होगा तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और श्रमिक सशक्त होगा तो राष्ट्र की आर्थिक नींव मजबूत होगी।
विकास का वास्तविक लाभ श्रमिक परिवार तक पहुंचे
उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति का वास्तविक मूल्यांकन केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि श्रमिक परिवार के जीवन स्तर से होना चाहिए। विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और श्रमिक परिवार की रसोई, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं भविष्य की सुरक्षा में उसका असर दिखाई दे, तभी विकास को सार्थक माना जा सकता है।
AI और मशीनीकरण से रोजगार के सामने नई चुनौती
कार्यक्रम में बदलते औद्योगिक परिदृश्य पर भी गंभीर चर्चा हुई। मुश्ताक अहमद ने कहा कि आधुनिक मशीनीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कारण उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन पारंपरिक रोजगार के स्वरूप में भी बदलाव आ रहा है। ऐसे समय में श्रमिकों के लिए कौशल विकास और नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आईटी क्षेत्र में कार्य का दबाव, गिग वर्कर्स की सामाजिक सुरक्षा, प्रवासी श्रमिकों की सुविधाएं तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा जैसे विषय आने वाले समय में श्रम जगत की प्रमुख चुनौतियां रहेंगे।
श्रमिक अधिकारों के साथ कार्य सुरक्षा भी जरूरी
मुश्ताक अहमद ने कहा कि बदलते कार्यक्षेत्र में श्रमिकों के अधिकार, उचित वेतन, कार्यस्थल की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने श्रमिकों को संगठित शक्ति की महत्ता बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी को श्रमिक आंदोलन की जिम्मेदारी संभालने के लिए आगे आना होगा।
लेबर कोड पर संगठन के रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों और कार्य सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। श्रमिक और नियोक्ता को टकराव के बजाय आपसी विश्वास, संवाद और सकारात्मक सहयोग के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
भगवान विश्वकर्मा के कर्म और कौशल से प्रेरणा लेने का आह्वान
कार्यक्रम में भगवान विश्वकर्मा के कर्म, शिल्प और तकनीकी कौशल को याद करते हुए श्रमिकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। मुश्ताक अहमद ने कहा कि श्रमिक केवल उत्पादन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि देश की प्रगति की महत्वपूर्ण शक्ति हैं।
उन्होंने सभी श्रमिक साथियों को राष्ट्रीय श्रमिक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए श्रमिक हितों की रक्षा, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम में उपाध्यक्ष महेंद्र साहू, कोषाध्यक्ष संतोष देवांगन, रजनीश जरयाल, संजय यादव, विमल यदु, शेखर निर्मलकर, अजीत मलिक, मिलींद तामड़े, विमल यादव, अनूप साहू, देवा साहू, डामेन्द कुमार, राधेश्याम विश्वकर्मा, राजेन्द्र मेश्राम, नंदकुमार, काशीनाथ, प्रकाश ठाकुर सहित संघ के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।




