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गौमाता की आंखों में दर्द, सड़कों पर लाचारी… आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?
अजय यादव ने उठाई गौवंश संरक्षण की आवाज, बालोद में सुरक्षित आश्रय और ठोस व्यवस्था की दरकार

गौमाता की आंखों में दर्द, सड़कों पर लाचारी… आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?
अजय यादव ने उठाई गौवंश संरक्षण की आवाज, बालोद में सुरक्षित आश्रय और ठोस व्यवस्था की दरकार
बालोद। गौसेवा के संकल्प और आस्था के नारों के बीच सड़कों पर भटकते गौवंश कई सवाल खड़े कर रहे हैं। एक ओर बेजुबान मवेशियों की सुरक्षा चिंता का विषय है, तो दूसरी ओर सड़क पर उनके जमावड़े से राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
गौवंशों की स्थिति पर अजय यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर बेजुबानों को सुरक्षित आश्रय कब मिलेगा और जिम्मेदार इस दिशा में ठोस पहल कब करेंगे? जरूरत है कि प्रशासन, पशुपालक और समाज मिलकर इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाएं।
सवाल साफ है—गौसेवा केवल नारों तक सीमित रहेगी या गौवंशों की सुरक्षा के लिए धरातल पर भी प्रयास होंगे?




